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Stubble Burning: पराली जलाने पर हरियाणा सरकार की सख्ती, 30 हजार का जुर्माना, 70 टीमें रखेंगी नजर

On: अप्रैल 30, 2025 6:10 पूर्वाह्न
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Stubble Burning: पराली जलाने पर हरियाणा सरकार की सख्ती, 30 हजार का जुर्माना, 70 टीमें रखेंगी नजर
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Haryana government’s strictness on Stubble Burning, 30 thousand fine, 70 teams will keep an eye: करनाल, 30 अप्रैल 2025: हरियाणा में पराली जलाने की बढ़ती समस्या को देखते हुए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। करनाल जिले में अब पराली जलाने वाले किसानों पर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगेगा।

इसके लिए 70 निगरानी टीमें तैनात की गई हैं, जो गांव-गांव जाकर इस पर कड़ी नजर रखेंगी। साथ ही, सरकार किसानों को वैकल्पिक उपायों की जानकारी देकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग की अपील कर रही है। आइए, जानते हैं इस फैसले के पीछे की वजह और इसका असर।

पराली जलाने से पर्यावरण को नुकसान Stubble Burning

हर साल फसल कटाई के बाद कई किसान खेतों में बचे फसल अवशेषों को आग लगा देते हैं। करनाल जिले में ‘मेरी फसल, मेरा ब्योरा’ योजना के तहत 4 लाख 5 हजार एकड़ में गेहूं की खेती दर्ज की गई है।

कुछ किसान गेहूं कटाई के बाद पराली जलाकर खेत खाली करते हैं, जिससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। धुएं से सांस की बीमारियां और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। इसे रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं।

30 हजार रुपये तक का जुर्माना

करनाल कृषि विभाग ने पराली जलाने पर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का ऐलान किया है। पूरे राज्य में फसल अवशेष जलाने पर पहले से ही प्रतिबंध है।

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अगर कोई किसान इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसे न केवल जुर्माना भरना होगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है। यह कदम पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों को जागरूक करने के लिए भी उठाया गया है।

70 निगरानी टीमें सक्रिय

पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए करनाल जिले में 70 निगरानी टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को फसल अवशेष जलाने के नुकसान के बारे में जागरूक करेंगी।

साथ ही, खेतों में आग लगाने की किसी भी घटना पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। निगरानी टीमें प्रशासन के साथ मिलकर नियम तोड़ने वालों की पहचान करेंगी और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाएंगी।

वैकल्पिक उपायों की जानकारी

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे पराली जलाने के बजाय पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को अपनाएं। विभाग किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए वैकल्पिक उपाय, जैसे बायो-डीकंपोजर, कम्पोस्टिंग, और मशीनों से अवशेष प्रबंधन की जानकारी दे रहा है।

करनाल के एक किसान सतपाल सिंह ने बताया, “हमें बताया गया है कि पराली को जलाने के बजाय इसे खाद में बदला जा सकता है, जिससे मिट्टी को फायदा होगा। अब हम इन तरीकों को आजमाएंगे।”

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किसानों और पर्यावरण के लिए फायदेमंद

यह कदम न केवल पर्यावरण को बचाने में मदद करेगा, बल्कि किसानों को भी लंबे समय में फायदा पहुंचाएगा। पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल की पैदावार पर असर पड़ता है।

वैकल्पिक उपायों से किसान अपनी मिट्टी की उर्वरता बढ़ा सकते हैं और लागत भी बचा सकते हैं।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

करनाल के निवासी अनिल कुमार ने कहा, “हर साल पराली जलाने से धुआं इतना बढ़ जाता है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है।”

वहीं, कुछ किसानों का कहना है कि उन्हें वैकल्पिक उपायों के लिए और अधिक प्रशिक्षण और आर्थिक मदद की जरूरत है।

भविष्य के लिए एक कदम

हरियाणा सरकार का यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण और सतत खेती की दिशा में एक बड़ा कदम है। निगरानी टीमें और जागरूकता अभियान के जरिए सरकार किसानों को सही दिशा दिखाने की कोशिश कर रही है।

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अगर आप करनाल में हैं, तो कृषि विभाग की सलाह मानें और पराली जलाने से बचें। इससे न केवल पर्यावरण बचेगा, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ हवा मिलेगी।

राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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