हिसार (Hisar News) : जिले में 1995 में बाढ़ आई थी, अब भी हालात ठीक वैसे ही बने हैं। सिंचाई विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जिले के 83 गांवों में 53 हजार 925 एकड़ जमीन जलमग्न है। यहां 3.5 फीट तक पानी जमा है। ऐसे में खेती पूरी तरह तबाह हो चुकी है। कृषि विभाग के सर्वे के अनुसार भी जिले में 7.64 लाख एकड़ एरिया में धान, कपास व अन्य फसलों की बिजाई हुई थी, इसमें से 6.36 लाख एरिया में फसलों को बारिश व जलभराव के कारण नुकसान पहुंचा है। हिसार जिले के बीच से गुजर रही घग्गर मल्टीपर्पज ड्रेन के जगह-जगह टूटी। ड्रेन का निर्माण 30 साल पहले 1995 में किया गया था, इसकी कैपेसिटी 384 क्यूसिक पानी की है।
फसलों का नुकसान (एरिया एकड़ में)
कुल बिजित क्षेत्र: 7.64 लाख एकड़
कुल प्रभावित क्षेत्र: 6.36 लाख एकड़
फसल प्रभावित क्षेत्र:
धान: 2.12 लाख एकड़
कपास: 1.98 लाख एकड़
बाजरा: 59 हजार एकड़
गवार: 840 एकड़
मूंग (दलहन): 39 हजार एकड़
ऑयल सीड: 38 हजार एकड़
अन्य: 2,250 एकड़
कृषि विभाग की सर्वे रिपोर्ट
कुल बिजित क्षेत्र: 3.13 लाख एकड़
कुल प्रभावित क्षेत्र: 6.36 लाख एकड़
नुकसान को चार कैटेगरी में बांटा गया है।
जहां जलभराव, वहां 100% तक नुकसान
हकवि कृषि कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. आरके पननू ने बताया की बासमती धान का उत्पादन औसतन 12 क्विंटल और परमल 28 क्विंटल प्रति एकड़ तक होता है। यदि धान में 6 इंच से ज्यादा पानी खड़ा रहता है तो फसल को नुकसान पहुंचेगा।
अमेरिकन कपास का उत्पादन 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ तक रहता है। पानी खड़ा रह गया तो पौधे पीले पड़ जाएंगे और शत प्रतिशत नुकसान है। लगातार नमी से सुंडी के भी चांस बढ़ जाते हैं।
बारानी एरिया में उत्पादन में 8 से 10, सिंचित एरिया में 16 क्विंटल प्रति एकड़ तक रहता है। पानी खड़ा है तो फसल समाप्त है।
सब्जियां हांसी एरिया में ज्यादा है, यहां जलभराव भी ज्यादा है। इससे सब्जियों को काफी नुकसान है। अभी गोभी, तोरी, घीया, मिर्च, बैंगन सभी में नुकसान है। जलभराव है वहां शत प्रतिशत तक फसल तबाह है।
हिसार में किन्नू, अमरुद व बेर के बाग ज्यादा है। पानी खड़ा है वहां जड़ो में पौषक तत्व जमीन से नहीं ले पाते इससे बाग में बीमारियां भी आ सकती है।













