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Mustard Sowing: सरसों की बुवाई में देरी मत करना! 20 सितंबर के बाद ये गलती न करें वरना हो जाएगा नुकसान

On: सितम्बर 20, 2025 6:00 पूर्वाह्न
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Mustard Sowing: सरसों की बुवाई में देरी मत करना! 20 सितंबर के बाद ये गलती न करें वरना हो जाएगा नुकसान
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Mustard Sowing (रेवाड़ी) : रबी सीजन की सबसे पॉपुलर नकदी फसल सरसों की बुवाई अब बस कुछ दिनों की दूर है। 20 सितंबर के बाद किसान सरसों के बीज बोना शुरू कर देंगे। हरियाणा में करीब 5 लाख हेक्टेयर इलाके में सरसों की खेती होती है। सबसे ज्यादा उत्पादन वाले जिलों में रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी, हिसार और फतेहाबाद का नाम टॉप पर है। इन इलाकों में ही सरसों की सबसे ज्यादा बुवाई होती है। अभी से ही किसान अपने खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं।

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल में वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक डॉ. बलबीर सिंह बताते हैं कि जैसे ही दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास स्थिर हो जाएगा, तभी सरसों की बुवाई करें। अभी तो तापमान ज्यादा ही चल रहा है, इसलिए जल्दबाजी बिल्कुल न करें। इसी बीच खेतों की अच्छी तैयारी कर लें, ताकि फसल अच्छी हो।

सरसों की ये चुनिंदा किस्में लगाएं

सरसों की अच्छी पैदावार के लिए सही बीज का चुनाव बहुत जरूरी है। प्रति एकड़ सिर्फ एक किलोग्राम बीज डालने से काम चल जाता है। मुख्य किस्मों में आरएच-30, आरबी-55, आरएच-8812 (लक्ष्मी), आरएच-731, आरएच-819, आरएच-9304, आरएच-9801 (स्वर्ण ज्योति), आरएच-9801, आरएच-725, आरएच-1424, आरएच-1706 शामिल हैं। ये सभी किस्में प्रमाणित हैं और सिंचित भी हों या बारानी इलाके, दोनों के लिए परफेक्ट हैं।

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खेत की तैयारी और बुवाई का तरीका भी सही रखें। बीज के अच्छे अंकुरण के लिए खेत को बखूबी तैयार करना पड़ता है। सरसों के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सबसे बेस्ट रहती है, जो भुरभुरी हो। खरीफ फसल कटाई के बाद मिट्टी पलटने वाले हल से एक गहरी जुताई करें। फिर हैरो या कल्टीवेटर से 2-3 बार जुताई करके पाटा जरूर लगाएं, जिससे खेत बराबर और नमीयुक्त हो जाए। सिंचित खेतों में प्रति एकड़ सवा किलोग्राम बीज ही काफी है। वहीं, बारानी हालात में जमीन की नमी के मुताबिक 2 किलोग्राम बीज डालें।

बुवाई का सही तरीका अपनाएं। सरसों को कतारों में 30 सेंटीमीटर के फासले पर 4 से 5 सेंटीमीटर गहराई पर हल से पोरा या ड्रिल विधि से बोया जाता है। बुवाई के तीन हफ्ते बाद पौधों की छंटाई कर दें, ताकि जगह-जगह अच्छे पौधे उगें।

उर्वरक कैसे डालें, ये टिप्स फॉलो करें

फसल को पोषण देने के लिए उर्वरक का सही इस्तेमाल करें। सिंचित हालात में फास्फोरस, पोटाश, जिंक सल्फेट और आधी नाइट्रोजन बुवाई से पहले ही डाल दें। फसल को फास्फोरस और गंधक की जरूरत पूरी करने के लिए सिंगल सुपर फास्फेट यूज करें, क्योंकि इसमें 12 प्रतिशत गंधक मिलता है। अगर डीएपी से फास्फोरस की पूर्ति कर रहे हैं, तो प्रति एकड़ 2 कट्टे (100 किलो) जिप्सम बुवाई से पहले की जुताई या बुवाई पूर्व सिंचाई के समय मिला दें।

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ये जरूरी बातें याद रखें, फसल बर्बाद न हो

भूमि की क्वालिटी और पानी की उपलब्धता देखकर ही सही फसल चुनें, जैसे तोरिया, सरसों या तारामीरा। खेत को अच्छे से तैयार करें और सिर्फ सिफारिश की गई किस्मों का ही इस्तेमाल करें। बुवाई ठीक समय पर करें, सही बीज की मात्रा से और पौधों में उचित दूरी रखें। उर्वरकों को भी सही डोज में डालें। फसल को कीड़ों-मकोड़ों से बचाएं, खासकर चेपे से। इसके लिए सही दवाई का समय पर छिड़काव जरूरी है। कटाई भी समय पर करें, ताकि फसल बिखरे न, वरना नुकसान हो जाएगा। खासकर तोरिया की तो जल्दी कटाई करें। अगर पाला लगने का खतरा हो, तो हल्की सिंचाई से फसल को बचाएं।

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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