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Organic Farming: जीवामृत: देसी खाद से दोगुनी फसल, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का आसान तरीका

On: जून 15, 2025 9:18 पूर्वाह्न
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Organic Farming: जीवामृत: देसी खाद से दोगुनी फसल, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का आसान तरीका
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Organic Farming: Jeevamrit: Double the crop with local manure, an easy way to increase soil fertility: जीवामृत (Jivamrit) खेती की दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। बिहार के रोहतास जिले के किसान लाल बाबू सिंह ने रासायनिक खादों को अलविदा कहकर इस देसी खाद को अपनाया और न केवल अपनी फसल की गुणवत्ता (Crop Quality) बढ़ाई, बल्कि मिट्टी की उर्वरता (Soil Fertility) को भी नया जीवन दिया।

उनकी इस पहल ने न सिर्फ उन्हें सम्मान दिलाया, बल्कि हजारों किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। आइए, जानें कि कैसे यह देसी ट्रिक खेती को बदल रही है और आप भी इसे अपने खेतों में आजमा सकते हैं।

देसी खाद की ताकत: रासायनिक खाद को कहें ना Organic Farming

आजकल ज्यादातर किसान फसल उत्पादन (Crop Production) बढ़ाने के लिए यूरिया और रासायनिक खादों पर निर्भर हैं। लेकिन लाल बाबू सिंह ने इस दिशा में एक नया रास्ता चुना। उनका मानना है कि रासायनिक खाद (Chemical Fertilizers) मिट्टी को बंजर बनाती है और फसलों के जरिए इंसानों की सेहत पर भी बुरा असर डालती है। इसलिए, उन्होंने अपने खेतों में जीवामृत (Jivamrit) का उपयोग शुरू किया।

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यह पूरी तरह प्राकृतिक और देसी सामग्री से बना मिश्रण है, जो मिट्टी को पोषण देता है और फसलों की पैदावार को बढ़ाता है। इससे न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता।

लाल बाबू का यह प्रयोग पिछले तीन सालों से चल रहा है। उनके खेतों में मिट्टी की बनावट बेहतर हुई है, और फसल की गुणवत्ता (Crop Quality) में भी सुधार देखने को मिला है। उनकी इस पहल को कई संस्थाओं ने सराहा और उन्हें पुरस्कारों से नवाजा गया। यह देसी खाद (Organic Fertilizer) न सिर्फ किफायती है, बल्कि इसे बनाना भी बेहद आसान है।

जीवामृत बनाने की आसान विधि

जीवामृत (Jivamrit) बनाने की प्रक्रिया इतनी सरल है कि कोई भी किसान इसे आसानी से अपना सकता है। लाल बाबू सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र (Agricultural Science Center) से प्रशिक्षण लेकर इसकी शुरुआत की। इसके लिए आपको चाहिए:

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200 लीटर पानी
10 लीटर देसी गाय का गोमूत्र
20 किलो ताजा गोबर
2 किलो गुड़
2 किलो चने का बेसन
1 किलो ऐसी मिट्टी, जहां रासायनिक खाद का उपयोग न हुआ हो

इन सभी सामग्रियों को एक ड्रम में अच्छे से मिलाएं। फिर इसे सात दिनों तक सुबह-शाम लकड़ी की डंडी से हिलाएं। यह मिश्रण एक एकड़ खेत के लिए पर्याप्त है।

इसे छिड़काव मशीन से खेत में डाला जा सकता है या सिंचाई के पानी के साथ मिलाकर उपयोग किया जा सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह मिट्टी में सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) को बढ़ावा देता है, जो मिट्टी की उर्वरता (Soil Fertility) को प्राकृतिक रूप से बढ़ाते हैं।

फसलों और मिट्टी पर जीवामृत का जादू

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लाल बाबू सिंह के अनुभव से पता चलता है कि जीवामृत (Jivamrit) का नियमित उपयोग खेतों को पूरी तरह जैविक (Organic Farming) बना देता है। चार सीजन तक इसका इस्तेमाल करने पर रासायनिक खाद की जरूरत खत्म हो जाती है। इससे फसल उत्पादन (Crop Production) न केवल बरकरार रहता है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी बढ़ती है। मिट्टी में प्राकृतिक पोषक तत्वों (Natural Nutrients) की मात्रा बढ़ती है, जिससे फसलें ज्यादा स्वस्थ और पौष्टिक होती हैं।

यह देसी खाद पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है। यह मिट्टी को बंजर होने से बचाती है और पानी की खपत को भी कम करती है। लाल बाबू का कहना है कि उनके खेतों में अब पहले से ज्यादा उपज हो रही है, और उनकी फसलें बाजार में अच्छी कीमत पर बिक रही हैं। उनकी इस सफलता ने अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है कि वे जैविक खेती (Organic Farming) की ओर कदम बढ़ाएं।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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