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कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 से नकली दवाओं पर सख्ती

On: January 8, 2026 8:10 AM
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खेती में कीटनाशक छिड़काव करते किसान और कृषि उपकरण
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 का नया मसौदा सार्वजनिक किया है। इसका उद्देश्य पुराने कीटनाशक अधिनियम 1968 और नियम 1971 को आधुनिक जरूरतों के अनुसार बदलना है। यह प्रस्ताव किसानों को सुरक्षित और मानक कीटनाशक उपलब्ध कराने के साथ नकली उत्पादों पर सख्त नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 क्या है

यह विधेयक खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों की गुणवत्ता, बिक्री और निगरानी के लिए नया कानूनी ढांचा तय करता है। मंत्रालय के अनुसार पिछले पांच दशकों में खेती की तकनीक, बाजार और सप्लाई चेन में बड़े बदलाव आए हैं, जिनके लिए पुराने कानून पर्याप्त नहीं रह गए थे।

किसानों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया कानून

नए मसौदे को किसान केंद्रित बताया जा रहा है। इसमें ऐसे प्रावधान शामिल हैं जो किसानों को बेहतर जानकारी, पारदर्शिता और सुरक्षा देने पर जोर देते हैं।

मुख्य बिंदु
• कीटनाशकों की ट्रेसबिलिटी, जिससे उत्पाद की पूरी जानकारी ट्रैक हो सके
• प्रक्रियाओं में डिजिटल और तकनीकी समाधान
• किसानों को नकली और घटिया कीटनाशकों से बचाने के उपाय

कृषि नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों का भरोसा बाजार पर बढ़ेगा और नुकसान की आशंका कम होगी।

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नकली कीटनाशकों पर सख्त कार्रवाई

मसौदे में नकली या बिना मानक वाले कीटनाशक बेचने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। अपराधों के निपटान के लिए कंपाउंडिंग व्यवस्था भी रखी गई है, जिसमें राज्य स्तरीय प्राधिकरण सजा तय करेगा।

सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य दंड के जरिए डर पैदा करना नहीं, बल्कि बाजार में अनुशासन लाना है।

टेस्टिंग लैब और प्रशासनिक सुधार

विधेयक में कीटनाशकों की जांच करने वाली लैब के लिए अनिवार्य एक्रेडिशन का प्रावधान रखा गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसानों तक केवल गुणवत्ता जांचे हुए उत्पाद ही पहुंचें।

साथ ही प्रशासनिक नियंत्रण को सरल बनाने की कोशिश की गई है, ताकि
• किसानों की सुरक्षा बनी रहे
• व्यवसाय करना आसान हो
• नियमों का पालन स्पष्ट और पारदर्शी रहे

जनता और हितधारकों से मांगे गए सुझाव

सरकार ने इस विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। मसौदा कृषि मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है, जहां कोई भी व्यक्ति इसे पढ़ सकता है।

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विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का खुला परामर्श बेहतर कानून बनाने में मदद करता है और जमीनी समस्याएं सामने लाता है।

सुझाव कैसे और कहां भेजें

मसौदे पर टिप्पणियां और सुझाव ईमेल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं। अंतिम तिथि 4 फरवरी 2026 तय की गई है।

सुझाव भेजते समय जरूरी जानकारी
• नाम और पदनाम
• संपर्क विवरण जैसे पता ईमेल मोबाइल
• संगठन या एजेंसी का नाम यदि संबद्ध हों

सरकार ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर मिले सभी सुझावों पर विधेयक को अंतिम रूप देते समय विचार किया जाएगा।

यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है

भारत में हर साल बड़ी संख्या में किसान नकली कीटनाशकों से नुकसान झेलते हैं। नए कानून से
• फसल सुरक्षा बेहतर होगी
• किसानों की आय पर सकारात्मक असर पड़ेगा
• कृषि बाजार में भरोसा मजबूत होगा

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नीति विश्लेषकों का मानना है कि यह विधेयक खेती को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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