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टमाटर की खेती में फल फटने की समस्या पर कृषि वैज्ञानिकों की नई सलाह

On: January 7, 2026 8:33 AM
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टमाटर की खेती में फल फटने की समस्या पर कृषि वैज्ञानिकों की नई सलाह
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सर्दी के मौसम में टमाटर की खेती करने वाले किसानों को अक्सर फल फटने की समस्या का सामना करना पड़ता है, जिससे उपज का बाजार मूल्य गिर जाता है। कृषि वैज्ञानिकों और राज्य कृषि विभाग ने इस नुकसान को कम करने के लिए वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपाय साझा किए हैं, ताकि किसान अपनी मेहनत का बेहतर दाम पा सकें।

टमाटर फटने की समस्या क्यों अहम है

टमाटर उत्तर भारत की सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली सब्जियों में से एक है। राज्य कृषि विभाग के अनुमान के अनुसार, फल फटने से 10 से 20 प्रतिशत तक उपज बेकार हो सकती है। फटा हुआ टमाटर मंडी में कम कीमत पर बिकता है या कई बार बिकता ही नहीं। यही कारण है कि यह समस्या सीधे किसान की आय से जुड़ी हुई है।

टमाटर में फ्रूट क्रैकिंग के मुख्य कारण

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के निदेशक डॉ पंकज त्रिपाठी के अनुसार, टमाटर के फलों के फटने के पीछे दो बड़े कारण सामने आते हैं।

1. असंतुलित सिंचाई

जब खेत लंबे समय तक सूखा रहता है और फिर अचानक ज्यादा पानी दिया जाता है, तो फल तेजी से आकार बढ़ाता है। इस दौरान छिलका उतनी तेजी से फैल नहीं पाता और फल फट जाता है।

2. पोषक तत्वों की कमी

विशेषज्ञों का कहना है कि बोरोन और कैल्शियम की कमी से टमाटर की त्वचा कमजोर हो जाती है। कमजोर छिलका तापमान में बदलाव या नमी बढ़ने पर आसानी से फट जाता है।

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इसके अलावा, सर्दियों में अचानक तापमान गिरने से भी यह समस्या बढ़ जाती है।

टमाटर की फसल को कैसे बचाएं

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए कुछ आसान लेकिन असरदार उपाय बताए हैं।

नियमित सिंचाई अपनाएं

  • खेत में नमी बनाए रखें

  • लंबे अंतराल के बाद अचानक भारी सिंचाई से बचें

पोषक तत्वों का सही उपयोग

  • बुवाई से पहले प्रति हेक्टेयर 10 किलो बोरेक्स पाउडर का भुरकाव करें

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  • खड़ी फसल में प्रति लीटर पानी में

    • 2 ग्राम बोरोन

    • 1 ग्राम कैल्शियम नाइट्रेट
      मिलाकर छिड़काव करें

जल निकास पर दें ध्यान

डॉ त्रिपाठी के अनुसार, जलभराव की स्थिति में जड़ें कमजोर हो जाती हैं, जिससे पौधा तनाव में आता है और फल खराब होने लगते हैं। इसलिए खेत तैयार करते समय नालियों और जल निकासी की व्यवस्था जरूरी है।

विशेषज्ञों की राय

कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान पोषण और सिंचाई प्रबंधन को सही तरीके से अपनाएं, तो टमाटर की गुणवत्ता और आकार दोनों बेहतर होते हैं। इससे मंडी में बेहतर भाव मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

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आगे क्या करें किसान

  • स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से मिट्टी की जांच कराएं

  • मौसम पूर्वानुमान के आधार पर सिंचाई की योजना बनाएं

  • संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं

क्यों जरूरी है यह सलाह

यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि छोटे और मध्यम किसान अपनी सीमित लागत में अधिक मुनाफा तभी कमा सकते हैं, जब फसल का नुकसान कम हो। वैज्ञानिक सलाह अपनाकर टमाटर की खेती को ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी बनाया जा सकता है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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