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गेहूं की फसल में जड़ माहों रोग से बचाव की पूरी जानकारी

On: January 6, 2026 5:44 PM
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गेहूं की फसल में जड़ माहों रोग से बचाव की पूरी जानकारी
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रबी सीजन में गेहूं की खेती किसानों की आय का प्रमुख आधार होती है। समय पर बुवाई, सिंचाई और खाद देने के बावजूद कई बार शुरुआती दौर में लगने वाले कीट रोग पूरी फसल को खतरे में डाल देते हैं। ऐसा ही एक गंभीर संकट है जड़ माहों रोग, जो बुवाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद दिखने लगता है और समय रहते नियंत्रण न होने पर उत्पादन को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

जड़ माहों रोग क्या है और कैसे फैलता है

जड़ माहों रोग वास्तव में एक कीट जनित समस्या है। इसमें बेहद छोटे कीट गेहूं की जड़ों से चिपक जाते हैं और पौधे का रस चूसने लगते हैं।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ये कीट मिट्टी के भीतर सक्रिय रहते हैं, इसलिए शुरुआत में इनकी मौजूदगी नजर नहीं आती। जैसे जैसे पौधे की जड़ कमजोर होती है, उसकी बढ़वार रुकने लगती है।

गेहूं की फसल पर इसका असर क्यों गंभीर है

जड़ों से रस निकलने के कारण
• पौधा पोषक तत्व नहीं ले पाता
• जड़ें कमजोर होकर गलने लगती हैं
• पौधा आसानी से उखड़ जाता है
• प्रभावित क्षेत्र में पैदावार तेजी से घटती है

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संक्रमण फैल जाए तो खेत के बड़े हिस्से में 15 से 30 प्रतिशत तक उत्पादन हानि हो सकती है, जिससे किसान की लागत भी नहीं निकल पाती।

जड़ माहों रोग की पहचान कैसे करें

खेत में दिखने वाले शुरुआती संकेत

• खेत में गोल घेरों में पौधों का पीला या सफेद पड़ना
• कुछ दिनों बाद पौधों का सूख जाना
• पौधे उखाड़ने पर जड़ का कमजोर या सड़ी हुई दिखना
• जड़ों पर हरे रंग के जूं जैसे सूक्ष्म कीट दिखाई देना

यही छोटे कीट माहों कहलाते हैं और यही असली नुकसान की वजह बनते हैं।

किस समय सबसे अधिक खतरा रहता है

कृषि अनुसंधान केंद्रों के अनुसार गेहूं में अलग अलग चरणों पर रोग लगते हैं।
जड़ माहों रोग आमतौर पर बुवाई के 20 से 30 दिन के बीच सक्रिय होता है।

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इसी समय कई क्षेत्रों में दीमक की समस्या भी देखने को मिलती है, जिससे किसान भ्रम में पड़ जाते हैं।

जड़ माहों और दीमक में अंतर समझना जरूरी

दोनों ही मिट्टी के भीतर जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं।
अच्छी बात यह है कि
• दोनों कीटों के नियंत्रण की दवा समान होती है
• अलग अलग रसायन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती
• लागत कम होती है और नियंत्रण प्रभावी रहता है

जड़ माहों रोग का वैज्ञानिक उपचार

यदि ऊपर बताए गए लक्षण दिखें तो तुरंत उपचार जरूरी है।

विशेषज्ञों की सलाह

• दवा का नाम क्लोरोपायरीफॉस
• मात्रा 1 लीटर प्रति एकड़
• तरीका सिंचाई के पानी के साथ मिलाकर खेत में देना

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इस विधि से दवा सीधे जड़ों तक पहुंचती है और कीट प्रभावी रूप से नष्ट होते हैं।

समय पर नियंत्रण क्यों जरूरी है

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती अवस्था में उपचार करने से
• फसल सुरक्षित रहती है
• दोबारा संक्रमण की संभावना कम होती है
• उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बनी रहती हैं

थोड़ी सी जागरूकता किसान की पूरी मेहनत को बचा सकती है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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