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Poultry Farming: झारखंड में अंडा उत्पादन को मिलेगा नया जोश, सब्सिडी और प्रशिक्षण से बदलेगी किसानों की किस्मत

On: मई 15, 2025 3:02 अपराह्न
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Poultry Farming: झारखंड में अंडा उत्पादन को मिलेगा नया जोश, सब्सिडी और प्रशिक्षण से बदलेगी किसानों की किस्मत
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Poultry Farming: Egg production in Jharkhand will get new impetus: Farmers’ fortunes will change with subsidy and training: झारखंड के किसान और पशुपालक अब एक नई सुबह की ओर बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार ने अंडा उत्पादन (egg production) और प्राकृतिक खेती (natural farming) को बढ़ावा देने के लिए दो क्रांतिकारी योजनाओं की शुरुआत की है।

इन योजनाओं के तहत न केवल पोल्ट्री फार्मिंग (poultry farming) को सब्सिडी और प्रशिक्षण के जरिए मजबूत किया जाएगा, बल्कि 12 जिलों में प्राकृतिक खेती के क्लस्टर बनाकर जैविक खेती को भी नई दिशा दी जाएगी। यह पहल न केवल स्थानीय स्तर पर उत्पादन को बढ़ाएगी, बल्कि किसानों की आय को दोगुना करने और पर्यावरण को संरक्षित करने में भी मदद करेगी।

अंडा उत्पादन को सब्सिडी: आत्मनिर्भरता की ओर कदम Poultry Farming

झारखंड सरकार ने अंडा उत्पादन को रफ्तार देने के लिए सब्सिडी आधारित योजना (egg production subsidy) की घोषणा की है। कृषि, पशुपालन और सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने हाल ही में हेसाग के पशुपालन निदेशालय में हुई एक समीक्षा बैठक में इस योजना को लागू करने के निर्देश दिए।

उनका कहना है कि झारखंड में अंडा उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, और यह योजना स्थानीय मांग को पूरा करने के साथ-साथ उद्यमिता को बढ़ावा देगी। इस योजना के तहत छोटे और मध्यम स्तर के पोल्ट्री फार्मर्स को आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिससे वे अपने व्यवसाय को शुरू कर सकें या उसका विस्तार कर सकें। इससे न केवल स्थानीय बाजार में अंडों की आपूर्ति बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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प्रशिक्षण से बढ़ेगा आत्मविश्वास

पोल्ट्री फार्मिंग को और प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के विशेषज्ञ जनसेवकों को अलग-अलग समूहों में प्रशिक्षण देंगे।

यह प्रशिक्षण पोल्ट्री फार्मिंग (poultry farming) के आधुनिक तरीकों, मुर्गियों की देखभाल, और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित होगा। प्रशिक्षण के जरिए किसान और पशुपालक न केवल तकनीकी ज्ञान हासिल करेंगे, बल्कि अपने व्यवसाय को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए आत्मविश्वास भी पाएंगे। यह कदम खासकर उन युवाओं के लिए फायदेमंद होगा जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की तलाश में हैं।

प्राकृतिक खेती: 12 जिलों में नई क्रांति

केंद्र सरकार के राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (National Mission on Natural Farming) के तहत झारखंड के 12 जिलों—रांची, पलामू, देवघर, दुमका, गिरिडीह, साहिबगंज, हजारीबाग, लोहरदगा, गुमला, गढ़वा, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिम सिंहभूम—में प्राकृतिक खेती (natural farming) को बढ़ावा दिया जाएगा।

इन जिलों में 88 प्राकृतिक खेती क्लस्टर बनाए जाएंगे, जहां जैविक और पर्यावरण-अनुकूल खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पहल का लक्ष्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से मुक्त करना है, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और उपभोक्ताओं को स्वस्थ उत्पाद मिलें। यह योजना न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगी, बल्कि किसानों की लागत को भी कम करेगी।

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झारखंड की अर्थव्यवस्था को नई दिशा

ये दोनों योजनाएं झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। अंडा उत्पादन (egg production) को बढ़ावा देने से स्थानीय बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।

वहीं, प्राकृतिक खेती से न केवल जैविक उत्पादों की मांग पूरी होगी, बल्कि किसानों को लंबे समय तक टिकाऊ आय का स्रोत मिलेगा। सरकार का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण, और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

निष्कर्ष: झारखंड का उज्ज्वल भविष्य

झारखंड सरकार की अंडा उत्पादन सब्सिडी और प्राकृतिक खेती की योजनाएं किसानों और पशुपालकों के लिए एक सुनहरा अवसर हैं। ये पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मिसाल कायम करेंगी।

अगर आप भी पोल्ट्री फार्मिंग या प्राकृतिक खेती में रुचि रखते हैं, तो इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए तैयार हो जाइए। झारखंड अब एक नई कृषि क्रांति की ओर बढ़ रहा है!

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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