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पूसा की नई फसल सलाह से गेहूं और सब्जी किसानों को अहम दिशा निर्देश

On: दिसम्बर 20, 2025 7:50 पूर्वाह्न
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पूसा की नई फसल सलाह से गेहूं और सब्जी किसानों को अहम दिशा निर्देश
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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा नई दिल्ली ने मौजूदा मौसम को देखते हुए किसानों के लिए ताजा फसल एडवाइजरी जारी की है। इसमें गेहूं, सरसों, आलू, प्याज और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को सिंचाई, उर्वरक, रोग और कीट प्रबंधन को लेकर स्पष्ट और समयबद्ध सलाह दी गई है। यह एडवाइजरी रबी सीजन में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ाने के उद्देश्य से जारी की गई है।

गेहूं की फसल में पहली सिंचाई क्यों है सबसे जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की पहली सिंचाई फसल की नींव तय करती है। जिन खेतों में गेहूं की फसल 21 से 25 दिन की हो चुकी है, वहां अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क रहने की संभावना को देखते हुए सिंचाई करने की सलाह दी गई है।

उर्वरक प्रबंधन का सही समय

  • पहली सिंचाई के 3 से 4 दिन बाद नाइट्रोजन आधारित उर्वरक की दूसरी खुराक दें

  • पानी की मात्रा संतुलित रखें ताकि जड़ों का विकास बेहतर हो

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि शुरुआती चरण में पानी की कमी से बालियों की संख्या और दानों का आकार प्रभावित हो सकता है।

अगेती और देर से बोई गई गेहूं के लिए अलग रणनीति

अगेती बुआई करने वाले किसान

जिन किसानों ने 25 अक्तूबर से 5 नवंबर के बीच गेहूं बोया है, उन्हें सलाह दी गई है कि

  • 30 से 35 दिन पर खरपतवार नियंत्रण करें

  • 21 से 25 दिन पर पहली सिंचाई अनिवार्य रूप से करें

  • खेत की नियमित निगरानी करें

देर से बोई गई गेहूं

5 नवंबर के बाद बोई गई फसल में भी पहली सिंचाई समय पर करने पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार देर से बोई गई फसल में समय की चूक पैदावार पर सीधा असर डालती है।

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गेहूं में रतुआ रोग से बचाव जरूरी

इस मौसम में पीला रतुआ और भूरा रतुआ गेहूं के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।

  • पत्तियों पर पीली या भूरे रंग की धारियां दिखें तो सतर्क हो जाएं

  • शुरुआती पीलापन हमेशा रतुआ नहीं होता, इसलिए पुष्टि जरूरी है

  • संदेह होने पर नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क करें

विशेषज्ञ बताते हैं कि समय रहते पहचान होने पर रतुआ से होने वाला नुकसान काफी हद तक रोका जा सकता है।

सरसों, प्याज और आलू की फसलों पर खास ध्यान

सरसों

  • देर से बोई गई सरसों में विरलीकरण और खरपतवार नियंत्रण करें

  • तापमान में गिरावट के कारण सफेद रतुआ रोग की निगरानी जरूरी

प्याज

  • रोपाई से पहले खेत में अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद और पोटाश का प्रयोग करें

आलू

  • उर्वरक देने के साथ मिट्टी चढ़ाने का काम करें

  • नमी अधिक होने पर आलू और टमाटर में झुलसा रोग का खतरा

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  • लक्षण दिखने पर डाईथेन एम 45 का अनुशंसित छिड़काव करें

सब्जियों की खेती में कीट और रोग प्रबंधन

जिन किसानों की टमाटर, फूलगोभी, बंदगोभी और ब्रोकली की पौध तैयार है, वे मौसम को देखते हुए रोपाई कर सकते हैं।

कीट नियंत्रण

  • गोभी वर्ग की सब्जियों में पत्ती खाने वाले कीटों पर नजर रखें

  • अधिक संख्या होने पर बीटी या स्पिनोसेड का छिड़काव करें

निराई गुड़ाई का सही समय

  • सब्जियों की निराई गुड़ाई करें

  • सिंचाई के बाद उर्वरक का बुरकाव करें

बागवानी फसलों में सावधानी

इस मौसम में मिलीबग के बच्चे आम के तनों पर चढ़ सकते हैं।

  • जमीन से लगभग 0.5 मीटर ऊंचाई पर अल्काथीन पट्टी बांधें

  • तने के आसपास मिट्टी की खुदाई कर अंडों को नष्ट करें

वहीं अधिक नमी के कारण गेंदे की फसल में पुष्प सड़न रोग की आशंका रहती है, इसलिए नियमित निरीक्षण जरूरी है।

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यह सलाह किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सही समय पर सिंचाई, उर्वरक और रोग प्रबंधन अपनाने से

  • पैदावार में 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है

  • लागत कम होती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर रहती है

  • मौसम के जोखिम से नुकसान घटाया जा सकता है

यह एडवाइजरी खास तौर पर छोटे और मध्यम किसानों के लिए उपयोगी मानी जा रही है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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