अंबाला. अंबाला में अशोक सोलंकी और जगदीश चंडोक सड़क सुरक्षा के लिए एक अनोखी मुहिम चला रहे हैं। जानें कैसे गांधीगिरी और रिफ्लेक्टर टेप के जरिए ये दोनों समाजसेवक कोहरे और हादसों से लोगों की जान बचा रहे हैं।
सड़क हादसों की खबरें अक्सर हमें विचलित कर देती हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी को अपनी मंजिल पर पहुंचने की जल्दी होती है और यही जल्दबाजी कई बार जानलेवा साबित होती है। अंबाला की सड़कों पर इन दिनों एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। यहां पुलिस चालान काटकर नहीं बल्कि दो आम नागरिक प्यार और समझाइश से लोगों को सुरक्षा का पाठ पढ़ा रहे हैं।
अशोक सोलंकी और जगदीश चंडोक ने सड़क सुरक्षा को अपना निजी मिशन बना लिया है। इनकी अनूठी पहल और जज्बा शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। आइए जानते हैं कि कैसे ये दो लोग समाज में बदलाव ला रहे हैं।
पहले सलाम फिर सुरक्षा का पैगाम
अशोक सोलंकी का तरीका इतना भावुक और असरदार है कि सामने वाला व्यक्ति शर्मिंदा हुए बिना नहीं रहता। वे सड़क पर बिना हेलमेट गाड़ी चलाने वालों को रोकते हैं। इसके बाद वे न तो गुस्सा करते हैं और न ही बहस करते हैं। वे सबसे पहले वाहन चालक को एक प्यारा सा सलाम करते हैं और फिर हाथ जोड़कर विनती करते हैं।

उनका कहना है कि भाई आपका जीवन आपके परिवार और बच्चों के लिए अनमोल है। वे लोगों को समझाते हैं कि घर पर कोई उनका इंतजार कर रहा है इसलिए हेलमेट जरूर पहनें। कई बार तो वे अपनी जेब से हेलमेट खरीदकर भी लोगों को पहना देते हैं। सोलंकी का मानना है कि सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें सिर की चोट की वजह से होती हैं। उन्होंने प्रण लिया है कि जब तक उनकी सांसें चलेंगी वे इसी तरह लोगों को जागरूक करते रहेंगे।
कोहरे में जीवन रक्षक बनी रिफ्लेक्टर टेप
दूसरी तरफ जगदीश चंडोक का अभियान कोहरे और रात के अंधेरे में होने वाले हादसों को रोकने पर केंद्रित है। जगदीश वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप लगाने का काम करते हैं। इस मुहिम के पीछे एक दर्दनाक कहानी छिपी है।
जगदीश बताते हैं कि एक बार वे पलवल से अंबाला लौट रहे थे। उस दिन घना कोहरा छाया हुआ था। उन्होंने अपनी आंखों के सामने गाड़ियों को आपस में टकराते देखा। उस हादसे का मुख्य कारण यह था कि वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप नहीं थी जिससे पीछे आने वाली गाड़ी को आगे चल रहा वाहन दिखाई नहीं दिया। उस दिन उन्होंने ठान लिया कि वे खुद अपने खर्च और मेहनत से वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाएंगे। देखने में यह एक साधारण चमकीली पट्टी लगती है लेकिन घने कोहरे में यह किसी की जान बचाने का सबसे बड़ा जरिया बन जाती है।
सड़क सुरक्षा आंकड़ों की जुबानी
यातायात विशेषज्ञों के अनुसार भारत में हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। इनमें से एक बड़ा आंकड़ा दोपहिया वाहन चालकों का होता है जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना होता। वहीं सर्दियों के मौसम में हरियाणा और पंजाब में धुंध के कारण विजिबिलिटी कम हो जाती है जिससे हादसों का ग्राफ बढ़ जाता है। ऐसे में रिफ्लेक्टर टेप और हेलमेट सुरक्षा की पहली गारंटी माने जाते हैं।
हम सबकी है सामूहिक जिम्मेदारी
अशोक और जगदीश का यह प्रयास साबित करता है कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। एक जागरूक नागरिक के तौर पर हम भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। इन दोनों समाजसेवियों का मानना है कि अगर हम रफ्तार पर काबू रखें सीट बेल्ट लगाएं और यातायात नियमों का पालन करें तो कई परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सकता है। उनकी यह मुहिम अब एक जन आंदोलन का रूप लेती जा रही है।












