चंडीगढ़, 19 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा में लैंगिक संतुलन को मजबूत करने और घटते लिंगानुपात को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य अधिकारियों पर हंटर चलाया है। सूबे में कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग जांच के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में ढिलाई बरतने पर सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने आज चंडीगढ़ में इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि सरकारी योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग न करने और खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
इन चार वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों पर गिरी गाज
सरकार द्वारा जारी निलंबन आदेशों के तहत जिन चार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें सोनीपत के पुरखास पीएचसी (PHC) में तैनात एसएमओ डॉ. टीना आनंद, यमुनानगर के रादौर पीएचसी के एसएमओ डॉ. विजय परमार, रोहतक के चिड़ी पीएचसी के एसएमओ डॉ. सतपाल और नारनौल के सहलांग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभा शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों पर अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लिंगानुपात सुधार के उपायों को लागू करने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप है।
नियम-7 के तहत चार्जशीट
निलंबित किए गए इन सभी डॉक्टरों के खिलाफ सरकार ने प्रशासनिक शिकंजा कसते हुए हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम-7 के तहत विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही निलंबन अवधि के दौरान इन्हें इनके मौजूदा जिलों से हटाकर क्रमशः रोहतक, अंबाला, झज्जर और रेवाड़ी के सिविल सर्जन कार्यालयों से संबद्ध कर दिया गया है। सरकार की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
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