झज्जर. हरियाणा की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ ने 77वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति के साथ झंडा फहराया। एनसीसी से वायुसेना तक का उनका सफर और 2 महीने का कड़ा अभ्यास युवाओं के लिए प्रेरणा है।
सोमवार को देश के ७७वें गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ पर एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। भारतीय वायु सेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ मिलकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। यह दृश्य न केवल महिला सशक्तिकरण की एक दमदार तस्वीर थी बल्कि यह भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बदलती और मजबूत होती भूमिका का भी प्रमाण था।
हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च मंच तक पहुंचने का अक्षिता का सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। आइए जानते हैं कि कैसे कासनी गांव की इस बेटी ने अपने सपनों को उड़ान दी।
पिता से मिली वर्दी पहनने की प्रेरणा
अक्षिता धनखड़ का जन्म हरियाणा के झज्जर जिले के कासनी गांव में हुआ था। यह गांव अपनी सैन्य परंपराओं के लिए जाना जाता है और यहां के हर दूसरे घर से कोई न कोई सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। अक्षिता बताती हैं कि उनके पिता ने भी गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लिया था। बचपन में जब वह अपने पिता को वर्दी में परेड करते देखती थीं तो उनके मन में भी देश सेवा का जज्बा पैदा हुआ।
उसी वक्त उन्होंने ठान लिया था कि एक दिन वह भी यह वर्दी पहनेंगी और देश का मान बढ़ाएंगी। आज उनका वह सपना कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति के साथ खड़े होकर पूरा हुआ है।
एनसीसी कैडेट से वायुसेना अधिकारी बनने तक का सफर
अक्षिता की शुरुआती पढ़ाई लिखाई के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में दाखिला लिया। कॉलेज के दिनों में ही वह नेशनल कैडेट कोर यानी एनसीसी में शामिल हो गईं। वहां उन्होंने अपने अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया और कैडेट सार्जेंट मेजर के पद तक पहुंचीं। उनकी यूनिट आज भी उन्हें उनके बेहतरीन नेतृत्व के लिए याद करती है।
इसके बाद उन्होंने एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट पास किया और मैसूर स्थित एयर फोर्स सिलेक्शन बोर्ड से रिकमेंडेशन हासिल की। १७ जून २०२३ को उनका सपना हकीकत में बदला जब उन्हें भारतीय वायु सेना की एडमिनिस्ट्रेशन ब्रांच में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन मिला। अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्हें जल्द ही फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर प्रोमोशन मिल गया।
कड़ाके की ठंड और सुबह 4 बजे से अभ्यास
इस ऐतिहासिक दिन के पीछे महीनों की कड़ी तपस्या छिपी थी। मीडिया से बात करते हुए अक्षिता ने बताया कि इस पल के लिए पिछले दो महीनों से लगातार अभ्यास चल रहा था। कड़ाके की ठंड में सुबह जल्दी उठना और घंटों तक परफेक्ट कोऑर्डिनेशन के साथ रिहर्सल करना आसान नहीं था।
उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल अपने साहस, एकता और दृढ़ संकल्प के लिए ही जाने जाते हैं। जब आप देश के राष्ट्रपति के साथ झंडा फहराते हैं तो सारी थकान गायब हो जाती है और सिर्फ गर्व महसूस होता है।
नारी शक्ति के नाम रहा यह गणतंत्र दिवस
साल २०२६ का गणतंत्र दिवस कई मायनों में खास रहा क्योंकि इस बार पूरा फोकस नारी शक्ति पर था। भारतीय वायु सेना के बैंड में पहली बार महिलाओं को शामिल किया गया था। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर की याद में सिंदूर फाइटर फॉर्मेशन का प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र रहा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अक्षिता धनखड़ जैसी अधिकारियों का आगे आना यह साबित करता है कि अब महिलाएं सेना में केवल सपोर्ट रोल में नहीं हैं बल्कि वे नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
युवाओं के लिए बनीं रोल मॉडल
अक्षिता का मानना है कि जब देश के युवा कर्तव्य पथ पर होने वाले फ्लाईपास्ट और परेड को देखते हैं तो उनके अंदर देशभक्ति की भावना जागती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी यह उपलब्धि गांवों में रहने वाली उन हजारों लड़कियों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला देगी जो सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहती हैं।













