Arhar Farming With Paddy: Sow this along with paddy, double the profit in 3 months!: अरहर की खेती (Toor Dal Farming) हरियाणा के किसानों के लिए सुनहरा अवसर लेकर आई है। धान की बुवाई के साथ अरहर की फसल लगाकर किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा (Double Profit) कमा सकते हैं।
यह दलहनी फसल न केवल प्रोटीन से भरपूर है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता (Soil Fertility) को भी बढ़ाती है। जून-जुलाई में बुवाई के लिए यह सबसे सही समय है। आइए, जानें कि अरहर की खेती कैसे डबल फायदा दे सकती है और इसे सही तरीके से कैसे करें।
मेड बुवाई से जलभराव का खतरा खत्म Arhar Farming With Paddy
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश के अनुसार, अरहर की खेती (Pulse Crop) में मेड बनाकर बुवाई करना सबसे कारगर है। बरसात के मौसम में खेतों में जलभराव (Waterlogging) फसलों को नुकसान पहुंचाता है।
मेड बुवाई से पानी नालियों के जरिए बाहर निकल जाता है। इससे फसल सुरक्षित रहती है और पैदावार (Crop Yield) बढ़ती है। खेत की जुताई रोटावेटर से करें, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो। यह तरीका कम लागत में बेहतर उपज देता है। किसानों को इस तकनीक को अपनाने की सलाह दी जाती है।
सही समय और किस्मों का चयन
अरहर की बुवाई के लिए जून और जुलाई सबसे उपयुक्त महीने हैं। इस दौरान खेत में नमी (Moisture) पर्याप्त होती है, जो बीज अंकुरण (Seed Germination) के लिए जरूरी है। जल्दी पकने वाली किस्में जैसे पूसा अरहर 16 केवल 110-120 दिनों में तैयार हो जाती हैं।
वहीं, पूसा 992 और पूसा 2018 को 130-140 दिन लगते हैं। बुवाई के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 70-75 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20-25 सेंटीमीटर रखें। सही दूरी और गहराई से बुवाई फसल के विकास (Crop Growth) को बढ़ावा देती है।
दोहरा फायदा: मुनाफा और मिट्टी की सेहत
अरहर की खेती (Toor Dal Cultivation) से किसानों को दोहरा लाभ मिलता है। यह फसल प्रोटीन की कमी को पूरा करती है और बाजार में अच्छी कीमत देती है। साथ ही, यह मिट्टी की उर्वरता (Soil Health) को बढ़ाती है, जिससे अगली फसल की पैदावार बेहतर होती है।
धान के साथ अरहर की बुवाई से खेत का पूरा उपयोग होता है। कम लागत और कम मेहनत में यह फसल किसानों की आय (Farmer Income) को दोगुना कर सकती है। इस मौसम में अरहर की खेती शुरू करें और डबल मुनाफा कमाएं।













