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बिहार के गन्ना किसानों की चमकी किस्मत, खेती की मशीनों पर मिल रही 60 फीसदी सब्सिडी

On: January 13, 2026 9:18 AM
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बिहार के गन्ना किसानों की चमकी किस्मत, खेती की मशीनों पर मिल रही 60 फीसदी सब्सिडी
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बिहार सरकार ने गन्ना यंत्रीकरण योजना के तहत 154 किसानों का चयन किया है। इन्हें कृषि यंत्रों पर 60 फीसदी तक सब्सिडी मिलेगी। मशीन खरीदने की अंतिम तिथि 18 जनवरी 2026 है।

पटना। बिहार में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी सौगात दी है। खेती को आधुनिक और मुनाफेदार बनाने की दिशा में सरकार ने गन्ना यंत्रीकरण योजना के तहत खजाना खोल दिया है। अब किसानों को महंगे कृषि यंत्र खरीदने के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली नहीं करनी पड़ेगी। बिहार सरकार चयनित किसानों को आधुनिक मशीनों की खरीद पर 50 से 60 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दे रही है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा और खेती की लागत में कमी आएगी।

तीसरे चरण में 154 किसान हुए चयनित

गन्ना उद्योग विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025 26 के लिए तीसरे रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके तहत राज्य के कुल 154 भाग्यशाली किसानों का चयन किया गया है। इन किसानों को सरकार द्वारा 9 अलग अलग प्रकार के अत्याधुनिक कृषि यंत्रों पर सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। विभाग का मानना है कि मशीनीकरण से गन्ने की उत्पादकता बढ़ेगी और श्रम लागत में कमी आएगी।

इन मशीनों से बदलेगी खेती की तस्वीर

खेती में मशीनों का प्रयोग समय की मांग है। सरकार जिन यंत्रों पर सब्सिडी दे रही है वे खेती के हर चरण में मददगार साबित होंगे। चयनित किसान इन मशीनों को खरीद सकते हैं:

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  • मिनी ट्रैक्टर (4WD): छोटे खेतों की जुताई के लिए बेहतरीन।

  • रोटावेटर: मिट्टी को भुरभुरा बनाने के काम आता है।

  • लेजर लेवलर और लैंड लेवलर: खेत को समतल करने के लिए ताकि पानी की बचत हो सके।

  • पावर टिलर और पावर वीडर: निराई गुड़ाई के काम को आसान बनाते हैं।

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  • रैटून मैनेजमेंट डिवाइस: गन्ने की दूसरी फसल के प्रबंधन के लिए उपयोगी।

  • हाइड्रॉलिक स्प्रेयर: दवा छिड़काव के लिए ट्रैक्टर माउंटेड मशीन।

  • डिस्क हैरो: मिट्टी पलटने और तैयार करने के लिए।

खाते में सीधे आएंगे पैसे

सरकार ने सब्सिडी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखा है। चयनित किसानों को सबसे पहले अपनी पसंद के अधिकृत विक्रेता से पूरी कीमत चुकाकर मशीन खरीदनी होगी। यह खरीद ‘SuMech’ पोर्टल पर रजिस्टर्ड डीलरों से ही करनी होगी। मशीन घर लाने के बाद विभाग के अधिकारी उसका भौतिक सत्यापन करेंगे। सब कुछ सही पाए जाने पर अनुदान की राशि डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाएगी। इससे बिचौलियों का राज खत्म होगा और पैसा सीधे हकदार तक पहुंचेगा।

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18 जनवरी तक का है समय

किसानों को ध्यान देना होगा कि समय बहुत कम बचा है। विभाग द्वारा जारी किए गए स्वीकृति पत्र की वैधता केवल 18 जनवरी 2026 तक है। इसका मतलब है कि चयनित किसानों को इस तारीख से पहले हर हाल में यंत्र की खरीद करनी होगी। अगर कोई किसान इस समय सीमा में मशीन नहीं खरीदता है तो उसका स्वीकृति पत्र रद्द माना जाएगा और वह योजना के लाभ से वंचित हो जाएगा।

विशेषज्ञों की राय

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बिहार में गन्ने की खेती में अपार संभावनाएं हैं। पारंपरिक तरीकों से खेती करने पर लागत ज्यादा आती है और मुनाफा कम होता है। रैटून मैनेजमेंट डिवाइस और लेजर लेवलर जैसे यंत्रों के इस्तेमाल से पानी और खाद की बचत होती है जिससे शुद्ध मुनाफे में 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।

मदद के लिए यहां करें संपर्क

अगर किसी किसान को मशीन खरीदने या आवेदन से जुड़ी कोई समस्या आ रही है तो वह घर बैठे जानकारी ले सकता है। गन्ना उद्योग विभाग ने इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। किसान 0612 2215788 पर कॉल कर सकते हैं। यह सुविधा छुट्टी के दिनों को छोड़कर सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहेगी।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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