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Dragonflora Farms: ड्रैगन फ्रूट की खेती से बदली किसानों की किस्मत: डॉ. सुनीला कुमारी की प्रेरणादायक कहानी

On: मई 8, 2025 12:27 अपराह्न
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Dragonflora Farms: ड्रैगन फ्रूट की खेती से बदली किसानों की किस्मत: डॉ. सुनीला कुमारी की प्रेरणादायक कहानी
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Dragonflora Farms: Dragon fruit farming changed the fortunes of farmers: Inspiring story of Dr. Suneela Kumari: भारत की मिट्टी में अब केवल पारंपरिक फसलें ही नहीं, बल्कि विदेशी और पोषण से भरपूर ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलें भी लहलहा रही हैं।

इस बदलाव की अगुवाई कर रही हैं हरियाणा की बेटी, डॉ. सुनीला कुमारी, जिन्होंने अपनी दूरदर्शी सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सैकड़ों किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है। उनकी संस्था, ड्रैगनफ्लोरा फार्म्स, न केवल टिकाऊ खेती को बढ़ावा दे रही है, बल्कि भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़कर उनकी आय को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है। आइए, जानते हैं उनकी इस प्रेरणादायक यात्रा के बारे में।

एक सपने की शुरुआत: ड्रैगनफ्लोरा फार्म्स Dragonflora Farms

डॉ. सुनीला कुमारी कोई साधारण महिला नहीं हैं। बागवानी में पीएच.डी और इंटरनेशनल बिजनेस मैनेजमेंट में एमबीए की डिग्री के साथ, उनके पास शिक्षा, कॉर्पोरेट, और उद्यमिता का 15 साल से अधिक का अनुभव है। लेकिन उनका दिल हमेशा से किसानों की बेहतरी के लिए धड़कता था।

उन्होंने देखा कि भारतीय किसान मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन जानकारी और संसाधनों की कमी के कारण उनकी मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पाता। यहीं से जन्म हुआ ड्रैगनफ्लोरा फार्म्स का, जिसका उद्देश्य था ड्रैगन फ्रूट जैसी लाभकारी फसल को भारतीय खेतों तक पहुंचाना।

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डॉ. सुनीला बताती हैं, “ड्रैगन फ्रूट भविष्य का फल है। यह न केवल पोषण से भरपूर है, बल्कि इसे कम पानी और संसाधनों के साथ उगाया जा सकता है। यह फसल किसानों के लिए सोने की खान साबित हो सकती है।” उनकी यह सोच आज सैकड़ों किसानों की जिंदगी बदल रही है।

टिकाऊ खेती का नया मॉडल

ड्रैगनफ्लोरा फार्म्स की खासियत है इसका टिकाऊ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण। डॉ. सुनीला ने किसानों को जैविक खेती के तरीके सिखाए, जिसमें रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल न्यूनतम हो। वे प्रिसिजन फार्मिंग को बढ़ावा देती हैं, जिसमें पानी, खाद, और मेहनत का सटीक उपयोग होता है। इससे न केवल लागत कम होती है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता।

किसानों को बीज से लेकर फसल की बिक्री तक हर कदम पर मार्गदर्शन दिया जाता है। ड्रैगनफ्लोरा फार्म्स हर किसान की जमीन और जलवायु के हिसाब से वैज्ञानिक पैकेज उपलब्ध कराता है, जिसमें यह बताया जाता है कि कब, क्या, और कितना करना है। इसके अलावा, फसल को प्राकृतिक तरीके से ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए जूट की बोरियों और बांस की टोकरियों जैसी पर्यावरण-अनुकूल पैकिंग का उपयोग सिखाया जाता है।

किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम

डॉ. सुनीला की मेहनत का नतीजा है कि आज 100 से ज्यादा किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती से शानदार मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी ट्रेनिंग और वैज्ञानिक मार्गदर्शन ने किसानों को न केवल आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ने का रास्ता भी दिखाया। उनकी संस्था यह सुनिश्चित करती है कि किसानों की फसल सही दाम पर सही ग्राहक तक पहुंचे।

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डॉ. सुनीला का कहना है, “मेरा सपना है कि भारतीय किसान न केवल अपने देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बनाएं। ड्रैगन फ्रूट की खेती इसके लिए एक शानदार मौका है।”

चुनौतियां और समाधान

ड्रैगन फ्रूट की खेती को भारत में लोकप्रिय बनाने में कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी समस्या है जागरूकता की कमी। शहरों में भी लोग इस फल के स्वास्थ्य लाभों और खेती की संभावनाओं से अनजान हैं।

इसके अलावा, भारत अभी भी ड्रैगन फ्रूट का आयात करता है, जबकि स्थानीय किसान इसे उगा रहे हैं। इस अंतर को पाटने के लिए डॉ. सुनीला ने जागरूकता अभियान शुरू किए हैं। वे स्कूलों, कॉलेजों, और सामुदायिक समूहों में जाकर ड्रैगन फ्रूट के फायदे और खेती के तरीके समझाती हैं।

भविष्य की योजनाएं

डॉ. सुनीला का विजन केवल भारत तक सीमित नहीं है। वे ड्रैगन फ्रूट की खेती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाना चाहती हैं। उनकी योजना है कि भारतीय किसानों की फसल को वैश्विक बाजार में पहचान मिले और वे निर्यात के जरिए ज्यादा मुनाफा कमा सकें। साथ ही, वे नई तकनीकों और टिकाऊ खेती के तरीकों को और विकसित करने पर काम कर रही हैं।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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