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रबी सीजन में लहसुन खेती से लाखों की कमाई जानें सबसे ज्यादा उपज देने वाली किस्में

On: December 8, 2025 8:32 AM
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रबी सीजन में लहसुन खेती से लाखों की कमाई जानें सबसे ज्यादा उपज देने वाली किस्में
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भारत में लहसुन की खपत पूरे साल होती है, यही कारण है कि इसे किसान अक्सर सफेद सोना कहते हैं। यह फसल न केवल रसोई की ज़रूरत है, बल्कि औषधीय उपयोग, मसाला उद्योग, प्रोसेसिंग यूनिट और निर्यात कारोबार में भी इसका बड़ा योगदान है। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि इसकी खुशबू और रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण दुनिया भर में भारतीय लहसुन की मांग लगातार बढ़ रही है।

रबी सीजन में किसान ऐसी फसल की तलाश में रहते हैं जो सुरक्षित रखी जा सके और बेहतर मूल्य दे। इस दृष्टि से लहसुन एक मजबूत विकल्प बन चुका है, क्योंकि इसकी भंडारण क्षमता लंबी होती है और किसान बाजार में सही समय देखकर इसे बेच सकते हैं।

किसानों के लिए बढ़िया विकल्प कौन सी किस्में

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान सही किस्म चुनते हैं, तो उन्हें उन्नत उत्पादन के साथ दाम भी बेहतर मिलते हैं। देश में यमुना सफेद 3, एग्रीफाउंड पार्वती और ऊटी लहसुन को इस समय सबसे लाभदायक किस्मों में गिना जाता है।

यमुना सफेद 3 (G 282): देशभर में पसंद की जाने वाली प्रीमियम किस्म

इस किस्म की खासियत इसका चमकदार सफेद छिलका और बड़े, मजबूत कंद हैं। हर बल्ब में औसतन 15 से 16 कलियां मिलती हैं जो इसे बाजार में पहचान दिलाती हैं।

कृषि विभाग के अनुसार, किसान इस किस्म से 175 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज पा सकते हैं। इसकी पकाई अवधि लगभग 120 से 140 दिन होती है, इसलिए यह मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बेहतर प्रदर्शन करती है।

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एक व्यापार विश्लेषक बताते हैं कि खरीदारों में इस किस्म की मांग सबसे ज्यादा रहती है, जिससे किसानों को अक्सर बेहतर मूल्य मिलता है।

एग्रीफाउंड पार्वती (G 313): पर्वतीय क्षेत्रों के लिए खास किस्म

पार्वती किस्म का रंग गुलाबी और कलियां आकार में बड़ी होती हैं। इससे इसका व्यापारिक मूल्य बढ़ जाता है। कृषि वैज्ञानिक इसे जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए उपयुक्त मानते हैं।

इस किस्म की पकने में लगभग 230 से 250 दिन लगते हैं और किसान प्रति हेक्टेयर 200 से 225 क्विंटल तक उपज ले सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि ऑर्गेनिक खेती के बढ़ते चलन में इस किस्म की बाजार में प्रीमियम डिमांड दिखाई दे रही है।

ऊटी लहसुन: बड़े आकार के कारण बाजार का पसंदीदा

ऊटी लहसुन अपने बड़े कंद और आसान छीलने वाले आकार के कारण उपभोक्ताओं में लोकप्रिय है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में इसकी खेती सबसे अधिक होती है।

सर्वे बताते हैं कि केवल मालवा और राजस्थान क्षेत्र में ही यह किस्म लगभग 80 से 90 प्रतिशत उत्पादन देती है। इसकी 120 से 140 दिन की फसल अवधि किसानों के लिए इसे आकर्षक बनाती है।

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कमाई कितनी हो सकती है

कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यदि बाजार में लहसुन का औसत मूल्य 3800 रुपये प्रति क्विंटल रहे तो किसान केवल यमुना सफेद 3 किस्म से लगभग 6.84 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक की आमदनी हासिल कर सकते हैं।

पार्वती और ऊटी जैसी किस्में भी 2.28 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर से अधिक शुद्ध लाभ देने की क्षमता रखती हैं, खासकर जब इन्हें ठीक समय पर बेचा जाए या स्टोरेज में रखा जाए

किसानों के लिए क्या सीख

  • सही किस्म का चुनाव ही लाभ का आधार है

  • बाजार की मांग और मूल्य समय को समझना जरूरी है

  • वैज्ञानिक सलाह के साथ उन्नत खेती तकनीक अपनाने से उत्पादन बढ़ता है

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कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान जल प्रबंधन, रोग नियंत्रण और बाजार अनुसंधान पर ध्यान दें तो लहसुन खेती लंबे समय तक कमाई का मजबूत विकल्प बन सकती है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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