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गन्ने की खेती छोड़ रहे हरियाणा के किसान अब 5000 रुपये की सब्सिडी से होगा मुनाफे का इंतजाम

On: मार्च 11, 2026 12:32 अपराह्न
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गन्ने की खेती छोड़ रहे हरियाणा के किसान अब 5000 रुपये की सब्सिडी से होगा मुनाफे का इंतजाम
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चंडीगढ़ . हरियाणा की पहचान हमेशा से एक प्रमुख कृषि राज्य के रूप में रही है लेकिन अब यहां के खेत एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में राज्य के किसानों का मोह गन्ने की खेती से टूटता नजर आ रहा है। विधानसभा में पेश किए गए ताजा आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि गन्ने के रकबे और उत्पादन में भारी गिरावट आई है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती लागत ने इस नकदी फसल को किसानों के लिए मुश्किल बना दिया है। यही कारण है कि अब सरकार को इस स्थिति से निपटने के लिए नई और आकर्षक योजनाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।

आंकड़ों में समझें गन्ने की खेती का हाल

साल 2020 और 2021 के मुकाबले 2025 और 2026 तक गन्ने की खेती वाले इलाके में करीब 83658 एकड़ की भारी कमी का अनुमान है। केवल जमीन ही नहीं बल्कि गन्ने की पैदावार भी घटी है। प्रति एकड़ औसत उत्पादन में लगभग 18 क्विंटल की गिरावट आई है और कुल उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

इसका सीधा असर राज्य की चीनी मिलों पर दिख रहा है। गन्ने की कमी के कारण मिलों के काम करने के दिनों में लगभग 40 प्रतिशत की कटौती हो गई है जो चीनी उद्योग के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

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आखिर क्यों दूर हो रहे हैं किसान

विधानसभा के बजट सत्र में विधायक घनश्याम दास अरोड़ा द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में सहकारिता मंत्री डॉ अरविंद शर्मा ने इस गिरावट के मुख्य कारण बताए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते मौसम का मिजाज गन्ने की फसल को काफी नुकसान पहुंचा रहा है।

इसके अलावा कटाई के वक्त मजदूरों का समय पर ना मिलना और आधुनिक कृषि उपकरणों की कमी भी बड़ी समस्याएं हैं। कृषि अर्थशास्त्रियों का भी कहना है कि जब तक बिजाई और कटाई की प्रक्रिया को सस्ता तथा मशीनीकृत नहीं किया जाएगा तब तक किसानों का मुनाफा बढ़ाना कठिन है।

संकट से उबारने के लिए सरकार का मेगा प्लान

किसानों को वापस गन्ने की खेती से जोड़ने के लिए कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कई नई और बढ़ाई गई सब्सिडी की जानकारी दी है। वित्तीय वर्ष 2026 और 2027 के बजट में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं।

  • तकनीक पर जोर: नई तकनीक अपनाने पर अब प्रति एकड़ 3000 रुपये की जगह 5000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी।

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  • उन्नत बीज: बीमारियों से मुक्त और उन्नत किस्म जैसे सीओ 15023 के बीज खरीदने या तैयार करके बेचने पर भी 5000 रुपये का अनुदान मिलेगा।

  • बिजाई के नए तरीके: सिंगल बड या एक आंख वाली विधि से गन्ने की बिजाई करने वाले किसानों की प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 5000 रुपये कर दी गई है।

  • वैज्ञानिक खेती: खेत में चार फीट की दूरी पर गन्ने की चौड़ी लाइनें लगाने पर भी अब 5000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।

भविष्य की तकनीक और मशीनों का सहारा

खेती को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए सरकार टिश्यू कल्चर तकनीक को बढ़ावा दे रही है। आने वाले समय में इस विधि को अपनाने वाले किसानों को गन्ने के पौधे बिल्कुल मुफ्त दिए जाने का प्रस्ताव है। वहीं सबसे बड़ी समस्या यानी कटाई के लिए सहकारी चीनी मिलें किसानों को गन्ना हार्वेस्टर मशीनें उपलब्ध कराएंगी। इससे ना केवल मजदूरों पर निर्भरता कम होगी बल्कि कटाई का खर्च भी काफी घट जाएगा।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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