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गन्ना किसानों के लिए गुड न्यूज! नई तकनीक और सीओ-15023 बीज पर मिलेगी बंपर सरकारी मदद

On: March 8, 2026 12:10 PM
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गन्ना किसानों के लिए गुड न्यूज! नई तकनीक और सीओ-15023 बीज पर मिलेगी बंपर सरकारी मदद
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चंडीगढ़ . हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में राज्य के गन्ना किसानों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए ऐलान किया है कि गन्ने की खेती में नई तकनीक अपनाने वाले किसानों की आर्थिक मदद बढ़ाई जाएगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन के तहत सब्सिडी 3000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति एकड़ करने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का सीधा फायदा रोहतक, सोनीपत, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र बेल्ट के हजारों किसानों को मिलेगा, जिससे खेती की लागत घटेगी और आमदनी में इजाफा होगा।

सब्सिडी और नई तकनीक से किसानों को बंपर फायदा

सहकारिता मंत्री डॉ. शर्मा ने सदन में स्पष्ट किया कि रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले बीज तैयार करने पर भी सरकार प्रति एकड़ 5000 रुपये का अनुदान देगी। गन्ने की उन्नत किस्म सीओ-15023 का बीज खरीदने या उत्पादन करने वाले किसान इस योजना का सीधा लाभ उठा सकेंगे। आगामी बजट में टिशू कल्चर तकनीक से गन्ना लगाने वाले किसानों को बिल्कुल मुफ्त पौध देने की तैयारी है। इसके अलावा, मजदूरी का भारी खर्च घटाने के लिए अब सहकारी चीनी मिलों के जरिए गन्ना हार्वेस्टर मशीनें भी सीधे किसानों को मुहैया कराई जाएंगी।

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ऑनलाइन टोकन से खत्म हुआ मिलों के बाहर का जाम

किसानों की भारी परेशानी को दूर करते हुए प्रदेश की सभी सहकारी चीनी मिलों में ऑनलाइन टोकन सिस्टम पूरी तरह लागू कर दिया गया है। पहले किसानों को अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर मिलों के बाहर दिन-रात लाइन में लगना पड़ता था। अब घर बैठे ऑनलाइन टोकन बुक करने से किसानों का प्रति ट्रॉली 10 से 12 घंटे का कीमती समय बच रहा है। इस पारदर्शी व्यवस्था से चीनी मिलों को भी उनकी पेराई क्षमता के हिसाब से लगातार गन्ने की सप्लाई मिल रही है।

मौसम और बीमारियों ने घटाई गन्ने की पैदावार

विधानसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में गन्ने का रकबा और पैदावार दोनों में चिंताजनक गिरावट आई है। वर्ष 2020-21 में गन्ने की औसत पैदावार 347.68 क्विंटल प्रति एकड़ थी, जो 2025-26 में घटकर 329.59 क्विंटल प्रति एकड़ रहने का अनुमान है। डॉ. शर्मा ने बताया कि अप्रैल महीने में होने वाली बेमौसम बारिश से गन्ने के जमाव और फुटाव पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इसके साथ ही सीओ-0238 और सीओ-0118 जैसी प्रमुख किस्मों में चोटी बेधक कीट और उखड़ा रोग (रेड रॉट) लगने से भी उत्पादन 5.2 प्रतिशत तक गिर गया है।

पेराई के लिए मिलों को गन्ने का टोटा

गन्ने की खेती का कुल क्षेत्रफल घटने से इस बार प्रदेश की चीनी मिलों के सामने पेराई का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। चालू सीजन में मिलों को सिर्फ 509.47 लाख क्विंटल गन्ना मिलने का अनुमान है। गन्ने की इस कमी के चलते चीनी मिलों के बमुश्किल 108 दिन तक ही चल पाने की संभावना जताई गई है। मजदूरों की भारी कमी और लगातार बढ़ती मजदूरी दरों के कारण किसान गन्ने की जगह दूसरी फसलों का रुख कर रहे हैं, जिसे रोकने के लिए राज्य सरकार अब पूरी तरह मशीनीकरण पर जोर दे रही है।

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किसानों को जागरूक करने का महाभियान

गन्ना किसानों को समय पर उनके भुगतान की पक्की गारंटी देने के लिए राज्य सरकार हर साल अधिकतम राज्य सलाहकार मूल्य (SAP) घोषित करती है। इसके अलावा कृषि विभाग गांव-गांव जाकर किसानों को नई और मुनाफे वाली तकनीकों के प्रति जागरूक कर रहा है। पिछले पांच सालों में 225 किसान गोष्ठियों, 15 मेलों और 41 संवाद कार्यक्रमों के जरिए 28 हजार से ज्यादा किसानों को सीधी ट्रेनिंग दी गई है, ताकि वे गन्ने की खेती से दोबारा मोटा मुनाफा कमा सकें।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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