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सावधान किसान भाई, गेहूं बुवाई का आखिरी मौका है पास, 25 प्रतिशत ज्यादा बीज डालने से ही बनेगी बात

On: जनवरी 13, 2026 2:19 अपराह्न
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सावधान किसान भाई, गेहूं बुवाई का आखिरी मौका है पास, 25 प्रतिशत ज्यादा बीज डालने से ही बनेगी बात
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किसानों के पास गेहूं की पछेती बुवाई के लिए 15 जनवरी तक का समय है। वैज्ञानिकों ने 25 प्रतिशत अधिक बीज और PBW 833 जैसी उन्नत किस्मों के उपयोग की सलाह दी है।

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। जनवरी की शुरुआत में थोड़ी गर्मी महसूस होने के बाद अब एक बार फिर कड़ाके की ठंड लौटने वाली है। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि अगले दो हफ्तों तक मौसम शुष्क रहेगा और रात का तापमान 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।

ऐसे में जो किसान भाई गन्ने की कटाई या अन्य कारणों से अब तक गेहूं की बुवाई नहीं कर पाए हैं उनके लिए यह खबर बहुत महत्वपूर्ण है। कृषि वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि गेहूं की पछेती खेती के लिए अब बहुत कम समय बचा है।

बुवाई के लिए बचे हैं सिर्फ 2 दिन

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगर आप बेहतर उत्पादन चाहते हैं तो 15 जनवरी तक हर हाल में बुवाई का काम पूरा कर लें। जनवरी के महीने में ठंड और कोहरा बढ़ जाता है जिससे बीजों के अंकुरण में दिक्कत आती है। अगर इससे ज्यादा देरी हुई तो पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा। यह समय उन किसानों के लिए अंतिम विकल्प है जिनके खेत देर से खाली हुए हैं। इसे ‘अति विलंब’ यानी बहुत देर से होने वाली बुवाई की श्रेणी में रखा जाता है।

इन 5 किस्मों का ही करें चयन

जनवरी के महीने में सामान्य गेहूं की किस्में काम नहीं करतीं। इस समय केवल उन्हीं बीजों का उपयोग करना चाहिए जो कम समय में पककर तैयार हो जाएं और ठंड को सहन कर सकें। कृषि वैज्ञानिकों ने 5 उन्नत किस्मों की सिफारिश की है जो इस मौसम के लिए वरदान साबित हो सकती हैं।

  • PBW 833

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  • HD 3271

  • HI 1621

  • K 7903 (हलना)

  • K 9423 (उन्नत हलना)

ये किस्में जल्दी पकती हैं और बीमारी से लड़ने में सक्षम हैं।

बीज की मात्रा बढ़ाना है जरूरी

देर से बुवाई करने पर फसल को बढ़ने का पूरा समय नहीं मिल पाता है। सामान्य बुवाई में गेहूं के पौधे से कई कल्ले (Tillers) फूटते हैं लेकिन पछेती खेती में कल्ले कम निकलते हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए बीज की मात्रा बढ़ानी पड़ती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सामान्य दिनों के मुकाबले बीज की मात्रा 25 प्रतिशत तक बढ़ा देनी चाहिए। यानी एक हेक्टेयर खेत के लिए आपको लगभग 125 किलोग्राम बीज का इस्तेमाल करना होगा। इससे खेत में पौधों की संख्या सही रहेगी और पैदावार में कमी नहीं आएगी।

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खेत में नमी और जिंक का रखें ख्याल

इस समय बुवाई करते वक्त यह सुनिश्चित कर लें कि खेत में पर्याप्त नमी हो। सूखी मिट्टी में बीज अंकुरित नहीं हो पाएंगे। इसके अलावा पछेती गेहूं में अक्सर जिंक की कमी देखी जाती है। अगर बुवाई के 20 से 30 दिन बाद पत्तियों पर पीले धब्बे दिखें तो समझ जाएं कि फसल को जिंक की जरूरत है। इसके लिए 5 किलो जिंक सल्फेट और 16 किलो यूरिया को 800 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। अगर यूरिया नहीं है तो बुझे हुए चूने का पानी भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

सिंचाई से बचाएं पाले का असर

बढ़ती ठंड और पाला फसल का सबसे बड़ा दुश्मन है। इससे बचने का सबसे आसान तरीका है सही समय पर सिंचाई। किसान भाइयों को चाहिए कि वे हर 20 से 25 दिन के अंतराल पर फसल में हल्की सिंचाई करते रहें। गीली मिट्टी का तापमान सूखी मिट्टी से ज्यादा होता है जो नाजुक पौधों को पाले की मार से बचाता है।

FAQ’s

प्रश्न: जनवरी में गेहूं की बुवाई के लिए सबसे अच्छी किस्में कौन सी हैं?

उत्तर: जनवरी में पछेती बुवाई के लिए PBW 833, HD 3271, HI 1621 और हलना (K 7903) सबसे उपयुक्त किस्में मानी जाती हैं।

प्रश्न: देर से गेहूं बोने पर बीज की मात्रा कितनी रखनी चाहिए?

उत्तर: देर से बुवाई करने पर बीज की मात्रा सामान्य से 25 प्रतिशत बढ़ा देनी चाहिए यानी लगभग 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज का प्रयोग करें।

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प्रश्न: गेहूं की पछेती बुवाई की अंतिम तारीख क्या है?

उत्तर: कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अच्छी पैदावार के लिए 15 जनवरी तक बुवाई का काम पूरा कर लेना चाहिए।

प्रश्न: फसल को पाले से बचाने के लिए क्या करें?

उत्तर: फसल को पाले से बचाने के लिए खेत में नमी बनाए रखें और हर 20 से 25 दिनों के अंतराल पर हल्की सिंचाई करते रहें।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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