ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Mustard Crop Fertilizer: सरसों की बंपर पैदावार के लिए DAP या SSP? जानें एक्सपर्ट की सलाह!

On: अक्टूबर 28, 2025 8:56 पूर्वाह्न
Follow Us:
Mustard Crop Fertilizer: सरसों की बंपर पैदावार के लिए DAP या SSP? जानें एक्सपर्ट की सलाह!
Join WhatsApp Group

Mustard Crop Fertilizer DAP or SSP : सरसों की फसल का सीजन चल रहा है, और किसान भाई खाद चुनने को लेकर उलझन में हैं। दिल्ली छतरपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. कमलेश अहिरवार ने सरसों की बुवाई के लिए सही खाद चुनने की सलाह दी है, जो किसानों के लिए किसी खजाने से कम नहीं।

उनके मुताबिक, डीएपी (DAP) और एसएसपी (SSP) दोनों ही सरसों के लिए अच्छी खादें हैं, लेकिन इनके फायदे और नुकसान अलग-अलग हैं। डीएपी में 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस होता है, जो पौधों की शुरुआती ग्रोथ और जड़ों के लिए फायदेमंद है। लेकिन इसमें सल्फर की कमी है, जो लंबे समय में मिट्टी को नुकसान पहुंचा सकता है।

वहीं, एसएसपी में 16% फॉस्फोरस, 12% सल्फर और 20% कैल्शियम होता है, जो सरसों जैसी तेल वाली फसलों के लिए सबसे बेहतर है। डॉ. कमलेश की सलाह है कि अगर डीएपी उपलब्ध न हो, तो एसएसपी का इस्तेमाल करें, जो सस्ती और ज्यादा फायदेमंद है।

डीएपी के फायदे और कमियां Mustard Crop Fertilizer

डीएपी, यानी डाई अमोनियम फॉस्फेट, में 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस होता है। ये खाद पौधों को हरा-भरा बनाने और बीज अंकुरण में मदद करती है। फॉस्फोरस की ज्यादा मात्रा के कारण किसान इसे खूब पसंद करते हैं।

लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमी है सल्फर और कैल्शियम का न होना। लगातार डीएपी के इस्तेमाल से मिट्टी में इन तत्वों की कमी हो सकती है, जिससे पैदावार घट सकती है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि एक एकड़ में 40-50 किलो से ज्यादा डीएपी का इस्तेमाल न करें, वरना मिट्टी की उर्वरता कम हो सकती है।

हरियाणा में मधुमक्खी पालन पर बीमा सुरक्षा लागू, 50 रुपये में मिलेगा 1250 रुपये तक का क्लेम | haryana-mukhyamantri-bagwani-bima-yojana-beekeeping-insurance-claim
हरियाणा में मधुमक्खी पालन पर बीमा सुरक्षा लागू, 50 रुपये में मिलेगा 1250 रुपये तक का क्लेम

एसएसपी क्यों है खास?

एसएसपी, यानी सिंगल सुपर फॉस्फेट, में 16% फॉस्फोरस, 12% सल्फर और 20% कैल्शियम होता है। ये खाद सरसों, सूरजमुखी और मूंगफली जैसी तेल वाली फसलों के लिए बेस्ट है। सल्फर की मौजूदगी तेल की मात्रा बढ़ाती है और मिट्टी की सेहत को भी बेहतर बनाती है।

डीएपी की तुलना में एसएसपी सस्ती है, लेकिन इसमें नाइट्रोजन नहीं होता, इसलिए इसके साथ यूरिया मिलाना जरूरी है। एसएसपी का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये मिट्टी को लंबे समय तक पोषण देती है और पैदावार बढ़ाने में मदद करती है।

कौन सी खाद है बेस्ट?

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों, सूरजमुखी और मूंगफली जैसी तेल वाली फसलों के लिए एसएसपी सबसे अच्छा विकल्प है, क्योंकि सल्फर तेल की मात्रा बढ़ाता है।

वहीं, गेहूं और धान जैसी अनाज वाली फसलों के लिए डीएपी बेहतर हो सकता है। लेकिन लंबे समय तक सिर्फ डीएपी का इस्तेमाल मिट्टी को नुकसान पहुंचा सकता है। एक्सपर्ट्स सुझाव देते हैं कि एसएसपी को यूरिया और पोटाश के साथ मिलाकर डालें, ताकि डीएपी और एनपीके की जरूरत पूरी हो जाए। इससे फसल की पैदावार बढ़ेगी और मिट्टी की सेहत भी बनी रहेगी।

कीमत में कितना अंतर?

डॉ. कमलेश के अनुसार, एसएसपी की कीमत डीएपी से काफी कम है। बाजार में डीएपी का एक बैग 1,350-1,400 रुपये में मिलता है, जबकि एसएसपी 500-600 रुपये में उपलब्ध है।

गेहूं-सरसों की बिजाई पर नहीं होगी डीएपी की किल्लत, हरियाणा पहुंचा खाद का नया रैक | haryana-fertilizer-supply-dap-urea-rabi-crops-wheat-mustard-sowing
गेहूं-सरसों की बिजाई पर नहीं होगी डीएपी की किल्लत, हरियाणा पहुंचा खाद का नया रैक

अगर किसान एसएसपी को यूरिया और पोटाश के साथ मिलाकर इस्तेमाल करें, तो खर्च कम होगा और फायदा ज्यादा मिलेगा। खासकर सरसों की फसल के लिए एसएसपी बेस्ट है, क्योंकि ये तेल की मात्रा और पैदावार दोनों बढ़ाती है।

सरसों की बुवाई का सीजन

छतरपुर के किसान देवी दीन पाल ने बताया कि इन दिनों सरसों की बुवाई जोरों पर है, और बुवाई के साथ खाद डालने का काम भी चल रहा है।

वे कई सालों से डीएपी का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब कृषि विभाग एसएसपी और एनपीके जैसे विकल्पों की सलाह दे रहा है। छतरपुर के कृषि उप-संचालक डॉ. रवीश सिंह ने बताया कि जिले में डीएपी, एसएसपी, एनपीके और यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। किसानों को अपनी फसल और मिट्टी के हिसाब से सही खाद चुननी चाहिए।

एक्सपर्ट की सलाह

डॉ. कमलेश अहिरवार की सलाह है कि अगर डीएपी उपलब्ध न हो, तो किसान बेझिझक एसएसपी का इस्तेमाल करें। ये सरसों के लिए सबसे अच्छी और किफायती खाद है।

अगर डीएपी डालना ही हो, तो प्रति एकड़ 20-25 किलो जिप्सम या सल्फर पाउडर जरूर मिलाएं, ताकि सल्फर की कमी पूरी हो सके। कृषि विभाग के अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को बता रहे हैं कि डीएपी ही एकमात्र विकल्प नहीं है। एसएसपी और एनपीके जैसी खादें न सिर्फ पैदावार बढ़ा सकती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी लंबे समय तक बनाए रखती हैं।

औषधीय पौधों की खेती कैसे शुरू करें? जानिए शतावर, मूसली और मेंथा का सटीक बाजार भाव | medicinal-plants-farming-shatavari-mentha-ashwagandha-profit-cost-market-rate
औषधीय पौधों की खेती कैसे शुरू करें? जानिए शतावर, मूसली और मेंथा का सटीक बाजार भाव

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment