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Sweet baby corn: स्वीट और बेबी कॉर्न की खेती पर किसानों को मिलेगा 75% तक अनुदान

On: अप्रैल 17, 2025 1:46 अपराह्न
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Sweet baby corn: स्वीट और बेबी कॉर्न की खेती पर किसानों को मिलेगा 75% तक अनुदान
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Sweet baby corn cultivation tips details in Hindi: कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुजफ्फरपुर के प्रगतिशील किसान उमा शंकर सिंह की स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती की सफलता ने न केवल उनकी जिंदगी बदली है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का काम किया है। कृषि विभाग अब इन उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए 75% तक अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन, और बाजार से जोड़ने की सुविधा प्रदान करेगा। आइए जानते हैं कि यह पहल किसानों के लिए कैसे फायदेमंद होगी और कैसे आप इसका लाभ उठा सकते हैं।

उमा शंकर सिंह: नवाचार की मिसाल

15 अप्रैल 2025 को पटना के कृषि भवन में बिहार के कृषि सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने मुजफ्फरपुर के लक्ष्मण नगर निवासी किसान उमा शंकर सिंह से मुलाकात की। 10 एकड़ जमीन पर खेती करने वाले उमा शंकर ने पारंपरिक फसलों को छोड़कर केला, हल्दी, स्वीट कॉर्न, और बेबी कॉर्न जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाया। उनकी मेहनत और नवाचार ने न केवल उनकी आमदनी बढ़ाई, बल्कि उन्हें क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए रोल मॉडल बनाया। अग्रवाल ने उनकी उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि ऐसे किसानों को प्रोत्साहित करना विभाग की प्राथमिकता है।

Sweet baby corn: स्वीट और बेबी कॉर्न, ज्यादा मुनाफे का रास्ता

स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती न केवल कम लागत में ज्यादा मुनाफा देती है, बल्कि इनकी मांग भी बाजार में लगातार बढ़ रही है। ये फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं और इन्हें होटल, रेस्तरां, और घरेलू बाजारों में आसानी से बेचा जा सकता है। उमा शंकर जैसे किसानों की सफलता इस बात का सबूत है कि फसल विविधीकरण से किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है। कृषि सचिव ने बताया कि स्वीट और बेबी कॉर्न की खेती को बढ़ावा देने से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।

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अनुदान और तकनीकी सहायता

कृषि विभाग ने स्वीट और बेबी कॉर्न की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कई आकर्षक योजनाएं शुरू की हैं। किसानों को इन फसलों के लिए 75% तक अनुदान मिलेगा। गर्म मौसम के लिए बीज अनुदान की दरें इस प्रकार हैं: बेबी कॉर्न के लिए 50% या 500 रुपये प्रति किलोग्राम, और स्वीट कॉर्न के लिए 50% या 1500 रुपये प्रति किलोग्राम। यह अनुदान किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज खरीदने और उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगा। इसके अलावा, विभाग किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, उन्नत खेती की तकनीकों, और बाजार से जोड़ने की सुविधा प्रदान करेगा। इससे किसान अपनी फसल को सही दाम पर बेच सकेंगे।

फसल विविधीकरण: कृषि में नया दौर

कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि फसल विविधीकरण और मूल्यवर्धित खेती बिहार के कृषि परिदृश्य को बदल सकती है। पारंपरिक फसलों के साथ-साथ स्वीट और बेबी कॉर्न जैसी फसलों को अपनाने से किसान न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता को भी बढ़ावा दे सकते हैं। विभाग की योजनाएं किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। अग्रवाल ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में भी नवाचारी किसानों को हरसंभव सहायता दी जाएगी।

किसान कैसे उठाएं लाभ?

अगर आप स्वीट या बेबी कॉर्न की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या जिला कृषि अधिकारी से संपर्क करें। अनुदान के लिए आवेदन करने के लिए आपको जमीन का विवरण, आधार कार्ड, और बैंक खाता नंबर जैसे दस्तावेज जमा करने होंगे। इसके अलावा, विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लें, ताकि आप आधुनिक खेती की तकनीकों को सीख सकें। बाजार से जुड़ने के लिए स्थानीय मंडियों या कोऑपरेटिव सोसाइटीज से संपर्क करें।

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किसानों के लिए सुनहरा अवसर

स्वीट और बेबी कॉर्न की खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाने का एक शानदार तरीका है, बल्कि यह बिहार के कृषि क्षेत्र में नवाचार और स्थिरता को भी बढ़ावा देता है। 75% तक अनुदान, तकनीकी समर्थन, और बाजार से जोड़ने की सुविधा के साथ यह योजना किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर है। अगर आप भी अपनी खेती को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते हैं, तो इस पहल का हिस्सा बनें।

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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