Digital arrest 70-year-old woman in Chandigarh cyber fraud of Rs 2.5 crore: डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): चंडीगढ़ में साइबर अपराधियों ने एक नया हथकंडा अपनाकर 70 वर्षीय पूर्व चीफ आर्किटेक्ट से 2.5 करोड़ रुपये की ठगी (Cyber Fraud) की है। ठगों ने खुद को ट्राई, सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों के रूप में पेश करते हुए महिला को डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) का डर दिखाया। फर्जी कोर्ट ऑर्डर और वीडियो कॉल के जरिए मानसिक दबाव बनाकर ठगों ने रकम ट्रांसफर करवा ली। यह मामला साइबर अपराध (Cyber Crime) के बढ़ते खतरे की गंभीरता को दर्शाता है। आइए, इस घटना के विभिन्न पहलुओं को समझें।
Digital arrest: ठगों का नया हथकंडा
साइबर अपराधी (Cyber Criminals) अब डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। चंडीगढ़ की सेक्टर-10ए की रहने वाली सुमित कौर को 3 मई को एक फोन कॉल आया। कॉलर ने खुद को ट्राई (TRAI) का अधिकारी बताया और कहा कि उनके मोबाइल नंबर का गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद, ठगों ने उन्हें एक कथित सीबीआई डीआईजी (CBI Officer) से जोड़ा, जिसने मनी लॉन्ड्रिंग केस में उनका नाम होने का दावा किया।
फर्जी कोर्ट ऑर्डर और मानसिक दबाव
ठगों ने सुमित कौर को मानसिक रूप से डराने के लिए फर्जी गिरफ्तारी वारंट और सुप्रीम कोर्ट के जज की वीडियो कॉल (Fake Video Call) का सहारा लिया। उन्हें बताया गया कि उनके नाम से मुंबई के कैनरा बैंक में एक फर्जी खाता खोला गया है, जिसका इस्तेमाल अपराध में हो रहा है। ठगों ने गोपनीय जांच (Confidential Investigation) का हवाला देकर महिला को किसी से बात न करने की हिदायत दी। इस डर से महिला ने ठगों के निर्देशों का पालन किया।
2.5 करोड़ की रकम ट्रांसफर
4 मई को ठगों ने दावा किया कि सुमित कौर डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) में हैं और उन्हें हर समय मोबाइल ऑन रखना होगा। उनकी बैंक, बीमा, म्यूचुअल फंड और अन्य संपत्तियों की जानकारी मांगी गई। 5 मई को एक फर्जी सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर (Fake Court Order) दिखाकर उनकी सारी संपत्ति को 48 घंटे के लिए एक ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट’ में ट्रांसफर करने को कहा गया। दबाव में आकर महिला ने 2.5 करोड़ रुपये कई किश्तों में ट्रांसफर कर दिए।
ठगी का एहसास और पुलिस कार्रवाई
कुछ दिनों बाद जब ठगों के नंबर बंद हो गए और कोई संपर्क नहीं हुआ, तब सुमित कौर को ठगी (Cyber Fraud) का एहसास हुआ। उन्होंने सेक्टर 17 साइबर सेल पुलिस में शिकायत दर्ज की। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना साइबर अपराधियों (Cyber Criminals) की चालाकी और तकनीक के दुरुपयोग को उजागर करती है।
साइबर ठगी से बचाव के उपाय
यह मामला साइबर अपराध (Cyber Crime) से बचने की जरूरत को रेखांकित करता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अज्ञात कॉल्स पर भरोसा न करें और व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें। अगर कोई सरकारी अधिकारी होने का दावा करे, तो उसकी पहचान की पुष्टि करें। साइबर सेल (Cyber Cell) की मदद से ठगी की शिकायत तुरंत दर्ज करें। जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह के अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।













