Sonipat Crime, सोनीपत : सोनीपत में साइबर ठगों के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराने और ठगने वाले तीन बदमाशों को पुलिस ने मध्यप्रदेश के शिवपुरी से धर दबोचा। गिरोह का सरगना नीरज फर्जी इंस्पेक्टर बनता था, जबकि भागवत DSP बनकर धमकियां देता था। तीसरा आरोपी कृष्णपाल ठगी की रकम अपने खाते में जमा करता था। पुलिस ने इनके पास से 24,000 रुपये नकद, तीन मोबाइल फोन और बैंक खातों में जमा 2.2 लाख रुपये जब्त किए। आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
Sonipat Crime: कैसे हुई ठगी?
18 जून 2025 को नया बांसगांव के विकास ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 5 जून को उन्हें एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को दिल्ली के करोल बाग थाने का ‘सत्य यादव’ बताया। उसने कहा कि विकास के खिलाफ ड्रग्स बेचने की FIR दर्ज है। फर्जी पुलिसवाले ने वीडियो कॉल कर डराया और कहा कि उनके घर पुलिस भेजी जा रही है। बचने के लिए जुर्माना भरने को कहा गया। डर के मारे विकास ने पहले 7,210 रुपये दिए, लेकिन ठगों ने उनसे बार-बार पैसे मांगे। 13 जून तक विकास 3,87,410 रुपये ठगों के खातों में डाल चुके थे। जब फिर से कॉल आया और करोल बाग थाने बुलाया गया, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
पुलिस की कार्रवाई
साइबर थाना पुलिस ने 18 जून से जांच शुरू की। ASI जोगिंदर, मुख्य सिपाही गुलशन, जितेंद्र और सिपाही नवीन की टीम ने तकनीकी मदद से आरोपियों का पता लगाया। जांच में पता चला कि आरोपी शिवपुरी में छिपे हैं। पुलिस ने तुरंत वहां छापा मारकर नीरज, कृष्णपाल और भागवत को गिरफ्तार कर लिया। ये आरोपी 10वीं और 12वीं पास हैं, लेकिन ठगी का जाल बिछाने में माहिर थे।
साइबर ठगी से बचने की सलाह
पुलिस उपायुक्त कुशल पाल सिंह ने लोगों से साइबर ठगी से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें। केवल विश्वसनीय वेबसाइट्स का इस्तेमाल करें और लालच में न आएं। अगर आप ठगी का शिकार हो जाएं, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत करें या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।













