UPI Fraud UPI hack Crime News: डिजिटल दुनिया में UPI और ऑनलाइन पेमेंट ने जिंदगी को आसान तो बनाया है, लेकिन साइबर ठगों ने भी अपने जाल बिछाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब ठाणे पुलिस ने एक ऐसे साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो फिशिंग लिंक के जरिए लोगों के फोन हैक कर UPI पिन और जीमेल तक पहुंच जाता था।
इस गिरोह ने हैक किए गए खातों से फ्लिपकार्ट पर महंगे मोबाइल फोन खरीदे और उन्हें बेचकर मोटी कमाई की। ठाणे के भयंदर पुलिस ने इस मामले में आठ ठगों को धर दबोचा है। ये अंतरराज्यीय गिरोह फर्जी ऐप्स और लिंक्स के जरिए बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी कर रहा था। आइए जानते हैं, कैसे हुआ ये फ्रॉड और कैसे पकड़े गए ये ठग।
फिशिंग लिंक से शुरू होता था ठगी का खेल UPI Fraud
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह फिशिंग लिंक का इस्तेमाल कर लोगों के फोन हैक करता था। ये ठग कॉल और SMS फॉरवर्डिंग सेट कर UPI पिन और जीमेल तक पहुंच जाते थे। एक बार फोन हैक होने के बाद ये लोग OTP और बैंक डिटेल्स चुरा लेते थे। फिर इन जानकारियों का इस्तेमाल कर फ्लिपकार्ट से महंगे मोबाइल फोन खरीदते और उन्हें दूसरों को बेच देते। इस तरह ये गिरोह बिना किसी शक के लाखों रुपये की ठगी कर रहा था।
कैसे पकड़ में आए ठग?
पुलिस को इस फ्रॉड का पता तब चला जब अधिकारी संजय शिपाने और रविंद्र वाघ ने पिछले महीने राजस्थान के रिंकू कुमार श्रीरामजीलाल बैरवा को 11 महंगे मोबाइल फोन के साथ संदिग्ध हालत में पकड़ा। बैरवा पर आरोप है कि उसने लोगों के बैंक खाते हैक कर फ्लिपकार्ट से 4.77 लाख रुपये के फोन खरीदे।
इंस्टाकार्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की शिकायत पर उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ। इसके बाद पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर नवी मुंबई, भिवंडी, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान से छह और लोगों को गिरफ्तार किया। आखिरकार, मुख्य सरगना हार्डी उर्फ प्रिंस कमलेश सजनानी को 6 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ से पकड़ लिया गया। पुलिस ने इनके पास से 107 महंगे मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। जांच अभी भी जारी है।













