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Gurugram में Ahoi Ashtami 2025 का चांद और तारे देखने का समय, जानें मुहूर्त, पूजा विधि

On: अक्टूबर 9, 2025 2:17 अपराह्न
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Gurugram में Ahoi Ashtami 2025 का चांद और तारे देखने का समय, जानें मुहूर्त, पूजा विधि
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Ahoi Ashtami 2025 chand nikalne ka time Gurugram: अहोई अष्टमी हिंदू धर्म में माताओं के लिए एक बहुत ही खास और पवित्र व्रत है। जैसे करवा चौथ पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है, वैसे ही अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपने बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए करती हैं। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल अहोई अष्टमी 13 अक्टूबर 2025 को पड़ रही है। इस दिन माताएं सुबह से शाम तक निर्जला व्रत रखती हैं और तारों के दर्शन के बाद पूजा पूरी करती हैं। आइए जानते हैं इस व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका महत्व।

स्याहु माला का महत्व

स्याहु माला अहोई अष्टमी की पूजा का एक खास हिस्सा है। इस चांदी के लॉकेट वाली माला को पूजा के दौरान माता को अर्पित किया जाता है और फिर गले में पहना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह माला चंद्रमा की स्थिति को मजबूत करती है और शांति का प्रतीक मानी जाती है। इसे दीपावली तक रखने की परंपरा है, जो बच्चों की सुरक्षा और लंबी आयु के लिए शुभ मानी जाती है।

Gurugram में Ahoi Ashtami 2025 का चांद और तारे देखने का समय

पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी 2025 की तिथि और समय इस प्रकार हैं:

अष्टमी तिथि शुरू: 13 अक्टूबर 2025, दोपहर 12:24 बजे

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अष्टमी तिथि समाप्त: 14 अक्टूबर 2025, सुबह 11:09 बजे

पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:53 बजे से 7:08 बजे तक

तारों के दर्शन का समय: शाम 6:17 बजे

चंद्रोदय समय: रात 11:20 बजे

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माताएं सुबह से निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को तारों के दर्शन के बाद पूजा पूरी करती हैं। कुछ जगहों पर चंद्रोदय के बाद भी पूजा करने की परंपरा है। इस व्रत को अहोई आठमी भी कहा जाता है।

अहोई अष्टमी की पूजा विधि

अहोई अष्टमी का व्रत बच्चों की खुशहाली के लिए किया जाता है। इस दिन की पूजा विधि इस प्रकार है:

माताएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर अहोई माता का चित्र और व्रत कथा की किताब रखें। पूजा के लिए जल से भरा कलश, गंगा जल, फूल, धूप, घी का दीपक, रोली, कलावा, कच्चा चावल, गाय का दूध और करवा जैसी सामग्री तैयार करें। पूजा स्थल को लाल चुनरी, बिंदिया, सिंदूर, काजल, चूड़ी और अलता से सजाएं।

शुभ मुहूर्त में दीपक जलाकर अहोई माता से बच्चों की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। इस व्रत में स्याहु माला का विशेष महत्व है। यह एक चांदी का लॉकेट वाली माला होती है, जिसे पूजा के बाद गले में पहना जाता है और दीपावली तक रखा जाता है। यह माला बच्चों की दीर्घायु का प्रतीक मानी जाती है। पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ें और शाम को तारों के दर्शन कर अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत का पारण करें।

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अहोई अष्टमी का महत्व

अहोई अष्टमी का व्रत माताओं के लिए बहुत शुभ माना जाता है। यह व्रत बच्चों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए किया जाता है। यह पर्व मां के अपने बच्चों के प्रति प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की मंगल कामना के लिए पूरे मन से पूजा करती हैं। यह व्रत परिवारों को एक साथ लाता है और धार्मिक परंपराओं को जीवित रखता है।

राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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