चंडीगढ़, 19 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ‘म्हारी सड़क ऐप’ की समीक्षा बैठक में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर बड़ा एक्शन लिया है। सीएम ने खराब सड़कों की शिकायतों को एक-दूसरे विभाग पर टालने के मामले में एक दर्जन से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही टेंडर प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने के लिए अब ‘शॉर्ट-टाइम टेंडर’ व्यवस्था लागू की जाएगी।
हरियाणा की सड़कों को गड्ढा मुक्त और बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सख्त प्रशासनिक कदम उठाए हैं। मंगलवार को सचिवालय में ‘म्हारी सड़क ऐप’ की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हर जिले की जनपरिवाद और मासिक समीक्षा बैठकों में ऐप पर आने वाली कम से कम एक बड़ी शिकायत की अनिवार्य रूप से समीक्षा की जाएगी। सीएम ने साफ लहजे में कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
एक दर्जन से अधिक अफसरों पर गिरी गाज
समीक्षा बैठक के दौरान भिवानी, हिसार, फतेहाबाद, रोहतक, गुरुग्राम, करनाल और पानीपत जिलों के ऐसे मामले सामने आए, जहां अधिकारियों ने सड़कों की मरम्मत करने के बजाय शिकायतों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताकर दूसरे विभागों को ट्रांसफर कर दिया। विभागों की इस खींचतान के कारण लंबित पड़ी फाइलों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने एक दर्जन से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए।
तीन बार गलती पर सीधे ब्लैकलिस्ट
सड़कों की गुणवत्ता और ठेकेदारों की मनमानी पर अंकुश लगाते हुए मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए कि यदि डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (DLP) यानी गारंटी अवधि के दौरान ठेकेदार सड़क की मरम्मत नहीं करता है, तो संबंधित एजेंसी की बैंक गारंटी तुरंत जब्त कर ली जाए। अगर कोई फर्म लगातार तीन बार ऐसा करती है, तो उसे सरकारी काम से ब्लैकलिस्ट कर दिया जाए। इसके अलावा, टेंडर प्रक्रिया की सुस्ती को खत्म करने के लिए अब ‘शॉर्ट-टाइम टेंडर’ प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसके तहत महज 10 दिनों के भीतर बिड सबमिशन की कार्यवाही शुरू करनी होगी।
जनवरी से जुलाई के बीच पूरे होंगे कागजी काम
बैठक में हरसैक (HARSAC) के अधिकारियों ने बताया कि ‘म्हारी सड़क ऐप’ के दिसंबर 2025 में शुरू हुए सेकेंड वर्जन के तहत अब तक राज्य की 1,43,065 सड़कों की मैपिंग की जा चुकी है, जिनकी कुल लंबाई करीब 63,389 किलोमीटर है। मुख्यमंत्री ने मानसून और बारिश के मौसम को देखते हुए निर्देश दिए कि नई सड़कों के निर्माण से जुड़ी तमाम कागजी प्रक्रियाएं हर साल जनवरी से जुलाई के बीच ही पूरी कर ली जाएं। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और पीडब्ल्यूडी के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह सहित करीब 25 वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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