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जनवरी की कड़ाके की ठंड में भी लहलहाएंगे खेत, छोटे किसानों को लखपति बना देगी यह सस्ती तकनीक

On: जनवरी 14, 2026 9:23 पूर्वाह्न
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जनवरी की कड़ाके की ठंड में भी लहलहाएंगे खेत, छोटे किसानों को लखपति बना देगी यह सस्ती तकनीक
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लो टनल तकनीक से किसान जनवरी की ठंड में भी सब्जियों की अगेती नर्सरी तैयार कर सकते हैं। इससे फसल समय से पहले बाजार में आती है और किसानों को तीन गुना तक अधिक मुनाफा मिलता है।

नई दिल्ली. भारत में खेती किसानी आज भी मौसम पर बहुत हद तक निर्भर है। उत्तर भारत में जनवरी और फरवरी के महीने में कड़ाके की सर्दी पड़ती है और रात का तापमान 8 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है। ऐसे मौसम में खुले खेत में सब्जियों के बीज अंकुरित नहीं हो पाते और पौधे मर जाते हैं।

ज्यादातर किसान ठंड खत्म होने का इंतजार करते हैं और फरवरी के अंत में बुवाई शुरू करते हैं। लेकिन जो किसान थोड़ा स्मार्ट तरीके से सोचते हैं वे इसी समय का फायदा उठाकर लाखों का मुनाफा कमा लेते हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए ‘लो टनल तकनीक’ सुझाई है जो सर्दियों में खेती के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

क्या है लो टनल तकनीक

लो टनल तकनीक को आप गरीबों का ग्रीन हाउस या मिनी पॉली हाउस भी कह सकते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से उन किसानों के लिए है जिनके पास कम जमीन है और बजट भी सीमित है।

  • इसमें खेत के बेड के ऊपर लोहे की पतली छड़ों या बांस की खपचियों का इस्तेमाल करके एक ढांचा बनाया जाता है।

  • यह ढांचा 2 से 3 फीट ऊंचा और अर्धचंद्राकार होता है।

  • इसके ऊपर 20 से 30 माइक्रोन की पारदर्शी प्लास्टिक या पॉलीथीन की चादर चढ़ा दी जाती है।

  • यह प्लास्टिक सूर्य की गर्मी को अंदर सोख लेता है जिससे बाहर कड़ाके की ठंड होने के बावजूद अंदर का तापमान पौधों के लिए अनुकूल बना रहता है।

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अगेती खेती का गणित और मुनाफा

इस तकनीक का सबसे बड़ा खेल ‘टाइमिंग’ का है। जब आम किसान फरवरी या मार्च में बुवाई शुरू करते हैं तब तक लो टनल वाले किसानों की फसल तैयार हो चुकी होती है। साधारण विधि से उगाई गई सब्जियां अप्रैल मई में बाजार में आती हैं। उस समय आवक ज्यादा होने के कारण दाम गिर जाते हैं और मुनाफा कम होता है। वहीं लो टनल विधि से तैयार सब्जियां मार्च की शुरुआत में ही बाजार में पहुंच जाती हैं। उस समय मंडियों में सब्जियों की कमी होती है और भाव आसमान छू रहे होते हैं। यही वह समय होता है जब किसान अपनी उपज को मनचाहे दाम पर बेचकर सामान्य से तीन गुना ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।

कौन सी फसलें हैं सबसे उपयुक्त

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जनवरी के महीने में लो टनल के अंदर इन सब्जियों की नर्सरी तैयार करना सबसे फायदेमंद है

  • टमाटर

  • मिर्च और शिमला मिर्च

  • बैंगन

  • लौकी और तोरई

  • खीरा और ककड़ी

  • करेला

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  • तरबूज और खरबूज

वैज्ञानिकों की राय और नर्सरी का तरीका

भारतीय सब्जी अनुसंधान परिषद वाराणसी के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ सूर्य नाथ चौरसिया बताते हैं कि यह तकनीक बीजों के 100 प्रतिशत जमाव की गारंटी देती है। किसान भाई बाजार से सस्ती प्रो ट्रे खरीदकर उसमें कोकोपीट और वर्मीकम्पोस्ट का मिश्रण भरकर बीज लगा सकते हैं। इन ट्रे को टनल के अंदर रखने से मात्र 30 से 40 दिनों में स्वस्थ पौध तैयार हो जाती है। टनल के अंदर का वातावरण पौधों को पाले और कीटों के हमले से पूरी तरह सुरक्षित रखता है।

देखभाल के लिए जरूरी टिप्स

लो टनल में खेती करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

  • फर्टीगेशन: बीज जमने के बाद पौधों को ताकत देने लिए एनपीके खाद का हल्का घोल बनाकर देना चाहिए।

  • सफाई: पॉलीथीन पर धूल जमने से सूरज की रोशनी कम हो सकती है इसलिए उसे समय समय पर साफ करते रहें।

  • कठोरीकरण: जब दिन में अच्छी धूप निकले तो टनल के किनारों को थोड़ी देर के लिए खोल देना चाहिए। इससे ताजी हवा अंदर जाती है और पौधे बाहरी वातावरण को सहन करने लायक मजबूत बनते हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में हार्डनिंग या कठोरीकरण कहते हैं।

FAQ’s

प्रश्न: लो टनल तकनीक क्या है?

उत्तर: यह खेती की एक सस्ती विधि है जिसमें लोहे या बांस के ढांचे पर पारदर्शी प्लास्टिक लगाकर खेत में ग्रीन हाउस जैसा माहौल बनाया जाता है ताकि ठंड में भी पौधे उग सकें।

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प्रश्न: इस तकनीक से कौन सी सब्जियां उगाई जा सकती हैं?

उत्तर: लो टनल में टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा, लौकी, करेला, तरबूज और खरबूज जैसी सब्जियों की अगेती नर्सरी तैयार की जा सकती है।

प्रश्न: अगेती खेती से किसानों को क्या फायदा होता है?

उत्तर: अगेती खेती से फसल सामान्य सीजन से पहले तैयार हो जाती है। जब बाजार में सब्जियों की कमी होती है तब किसान इसे ऊंचे दामों पर बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाते हैं।

प्रश्न: क्या सरकार इस तकनीक के लिए मदद करती है?

उत्तर: हां, बागवानी विभाग किसानों को लो टनल और पॉली हाउस बनाने के लिए सब्सिडी और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।

सरकार भी कर रही है मदद

किसानों की आय बढ़ाने के लिए बागवानी विभाग भी इस तकनीक को जोर शोर से बढ़ावा दे रहा है। कई राज्यों में लो टनल बनाने के लिए सरकार की तरफ से अच्छी खासी सब्सिडी भी दी जाती है। यह तकनीक उन बेरोजगार युवाओं के लिए भी एक बेहतरीन बिजनेस मॉडल है जो केवल पौध तैयार करके और उसे बेचकर पैसा कमाना चाहते हैं।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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