ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Crop Compensation: बाढ़ से बर्बाद फसल का मुआवजा नहीं, किसानों के खाते अब भी खाली

On: November 12, 2025 8:54 PM
Follow Us:
Crop Compensation: बाढ़ से बर्बाद फसल का मुआवजा नहीं, किसानों के खाते अब भी खाली
Join WhatsApp Group

कैथल (Crop Compensation)। तेज बारिश और बाढ़ से इस बार किसानों की फसलें भारी नुकसान झेल चुकी हैं। जिला के करीब 273 गांवों के 9,745 किसानों ने पोर्टल पर मुआवजे के लिए आवेदन किया था। सरकार ने खराब फसलों की गिरदावरी करवा कर त्योहारों से पहले मुआवजा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक किसानों के खातों में एक रुपये तक की राशि नहीं पहुंची है।

Crop Compensation: बर्बाद फसल का मुआवजा नहीं

त्योहार बीत गए और धान खरीद सीजन भी लगभग समाप्त हो गया, मगर किसानों को केवल इंतजार ही मिला है। कई किसानों की फसलों पर बाढ़ के साथ आई रेत की मोटी परत चढ़ गई, जिससे वे फसल को मंडियों तक भी नहीं पहुंचा सके।

गुहला-चीका, सीवन, पूंडरी, कलायत और ढांड क्षेत्र में धान और अन्य फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। पटवारियों के सर्वे के बाद भी किसानों की मुआवजा राशि अब तक अटकी पड़ी है। मुख्य रूप से बौने पौधे और हल्दी रोग से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों ने धान फसलों के लिए आवेदन किया था, वहीं घग्गर नदी की बाढ़ से भी बड़ी तबाही हुई थी।

खेती की नई तकनीक: मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन से बढ़ाएं सब्जियों की पैदावार, देखें पूरी रिपोर्ट
खेती की नई तकनीक: मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन से बढ़ाएं सब्जियों की पैदावार, देखें पूरी रिपोर्ट

किसान राजकुमार ने बताया कि उनकी पूरी फसल बाढ़ में डूबकर खराब हो गई, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला। “अधिकारी कहते हैं कि सरकार को पैसा भेजना है, कब मिलेगा किसी को नहीं पता।”

वहीं किसान लक्खी शर्मा ने कहा कि बाढ़ के पानी ने उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया। जिन खेतों में रेत चढ़ गई, वहां की फसल बिक नहीं पाई। उन्होंने कहा कि त्योहार उधार लेकर मनाए, अब शादियों का समय है और चिंता बढ़ रही है। सरकार को तुरंत मुआवजा देना चाहिए।

फसल अवशेषों में आग न लगाए किसान

एसडीएम अजय सिंह ने गांव बाबालदाना और बरटा का दौरा कर किसानों को जागरूक करते हुए कहा कि किसान फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों में आग न लगाएं, बल्कि पराली का वैज्ञानिक प्रबंधन करें। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण रोका जा सकता है, बल्कि किसान अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं। इस मौके पर डीएसपी सुशील प्रकाश भी मौजूद रहे।

हरियाणा राजस्व विभाग का बड़ा फैसला: ऑफलाइन पैमाइश बंद, ई-जीआरएस पोर्टल पर ऐसे करें अप्लाई
हरियाणा राजस्व विभाग का बड़ा फैसला: ऑफलाइन पैमाइश बंद, ई-जीआरएस पोर्टल पर ऐसे करें अप्लाई

एसडीएम ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा गोष्ठियों और शिविरों के माध्यम से गांव-गांव जाकर किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन सहित कई हानिकारक गैसें निकलती हैं, जिनसे सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, दमा और हृदय रोग बढ़ जाते हैं। साथ ही, धुएं के कारण दृश्यता घटने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

पराली जलाने से मिट्टी के जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और उसकी उर्वरा शक्ति घट जाती है। पराली प्रबंधन के लिए सुपर सीडर, सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) और अन्य आधुनिक मशीनें किसानों की मदद कर सकती हैं।

पराली से बायोगैस, बायो-सीएनजी और बिजली उत्पादन किया जा रहा है। किसान बेलर व अन्य मशीनों की मदद से पराली को प्रबंधित कर अतिरिक्त आय का स्रोत बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो किसान पराली प्रबंधन करते हैं, उन्हें सरकार की ओर से 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।

खेती में होगा बड़ा बदलाव: हरियाणा के किसान सीखेंगे नई तकनीक, रहना और खाना देगी सरकार
खेती में होगा बड़ा बदलाव: हरियाणा के किसान सीखेंगे नई तकनीक, रहना और खाना देगी सरकार

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment