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Paddy Scam Karnal: धान घोटाला बेनकाब, UP-बिहार से ट्रक भरकर आ रही धान, किसान रो रहे

On: नवम्बर 2, 2025 9:09 पूर्वाह्न
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करनाल, (Paddy Scam Karnal): करनाल में धान खरीद का बड़ा घोटाला सामने आने और प्रशासन की सख्ती के बावजूद दूसरे प्रदेशों से धान का आना बंद नहीं हुआ। परेशान किसान बता रहे हैं कि जिन राइस मिलों में जांच के बाद सरकारी धान गायब मिली, अब वो मिलर अपनी सप्लाई पूरी दिखाने के लिए सस्ते में बाहर से धान मंगा रहे हैं। जिला प्रशासन सीमाओं पर नाकाबंदी का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और है।

Paddy Scam Karnal: गांवों में ट्रक लाइन से खड़े

सग्गा और सांभली गांव के किसानों ने बताया कि उनके आसपास की राइस मिलों के बाहर धान से भरे ट्रक खड़े हैं, जो उत्तर प्रदेश और बिहार से आए हैं। ये पीआर धान है। जांच में गायब मिले 25 हजार बैग की भरपाई के लिए बाहर से माल मंगवाया जा रहा है। असली किसानों का कहना है कि घोटाले की वजह से मंडियों में खरीद धीमी हो गई और पेमेंट में देरी हो रही। अगर पोर्टल और जमीन पर एक साथ सत्यापन होता, तो ये नौबत नहीं आती।

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पोर्टल पर खेल, असल में कुछ नहीं

बिना फिजिकल चेक के ऑनलाइन पोर्टल से खरीद को घोटाले की जड़ बताया जा रहा है। जांच में पता चला कि कई जगह धान न मंडी पहुंची, न मिल में गई, लेकिन रिकॉर्ड पूरे कर दिए गए। आढ़ती, अधिकारी और मिलरों ने मिलकर कागजों में खरीद दिखा दी। असल में UP-बिहार से सस्ती धान लाकर MSP पर बेची गई और करोड़ों का मुनाफा बांटा गया। अब तक साढ़े पांच करोड़ का घपला पकड़ा गया है।

अधिकारी सस्पेंड, मिलरों का गेट पास गेम

प्रशासन ने एक्शन लेते हुए फिजिकल वेरिफिकेशन कराया। गड़बड़ी मिलने पर घरौंडा मंडी इंस्पेक्टर यशवीर सिंह, जुंडला के संदीप शर्मा, करनाल के समीर वशिष्ठ, निसिंग के लोकेश, तरावड़ी सचिव संजीव सचदेवा और सब इंस्पेक्टर रामफूल को नामजद किया गया। मिलरों ने 200-300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेट पास बेचे। इन पास से पोर्टल पर खरीद दिखा दी, लेकिन न किसान से धान आई, न मंडी में स्टॉक जमा हुआ।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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